Wednesday, 21 December 2016

कुछ खास हूँ मैं ....

खुद से ही लड़ना है मुझे, खुद को ही हराना है ।
मै हिस्सा नहीं हूँ इस भीड़ का मुझमे छीपा एक जमाना है ।
चाहे देख न पाए कोई मुझमे छीपे उन आंधीयों को ,
फौलाद हूँ मैं ,
रोकते रहे मुझे कठिनाइयाँ
मुझे तो बस आगे बढ़ते जाना है ।
जानता हूँ कोई  मोल नहीं है अभी मेरा ,
अपनी मोल मै समझता हूँ ।रहता हूँ चुप चुप सा बस खुद से ये कहता रहता हूँ ......
हूँ मै जहाँ  भी आज अब धीरे धीरे आगे बढ़ते जाना है
लोगों के जुबान पर हो मेरा नाम
बस वो मुकाम पाना है । ।

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