Saturday, 17 February 2018

नही है कोई बात मुझमे , मेरी एक बात बन जाओ न तुम ||

नहीं है  कोई बात मुझमें, मेरी एक बात बन जाओ न तुम ।।


नही है कोई बात मुझमें, मेरी एक बात बन जाओ न तुम ।
टूट चुका हूं , अब तेरे बगैर
आओ फिर ले कर मेरा सिर अपने गोद में,
मुझे हँसाओ न तुम ।
नही है कोई बात मुझमे , मेरी एक बात बन जाओ न तुम ।

नही लगता दिल कही तेरे बगैर,
खोया खोया सा रहता हूं ।
आती नही नींदे रात भर,
तेरी यादों को पिरोया करता हूँ ।
सोच सोच कर उन हसीन लम्हो को, रोता रहता हूँ मैं ।
क्या कहूँ, कैसे कहूँ
बस खुद को कोसता रहता हूँ मैं ।
बिखर रही है अब ज़िन्दगी मेरी,
आकर एक बार फिर संभाल जाओ न तुम,
नहीं है कोई बात मुझमें,
मेरी एक बात बन जाओ न तुम ।


कहते हैं लोग अब, खूब मुस्कुराया करता हूँ ।
क्या जाने वो बेखबर
किस कदर मैं दर्द छिपाया करता हूँ ।
कभी हंसता हूँ, कभी रोता हूँ ।
कभी लिख लिख कर उन लम्हो को फिर से मैं जीता हूँ ।
ढूंढती हैं निगाहें तुम्हे
ले कर तुम्हारी तस्वीर बार बार तकता रहता हूँ ।
आओ न तुम , फिर से संभाल लो मुझे ।
डांटो तुम, प्यार से मार लो मुझे ।
बना कर बच्चो सी शक्ल,
बड़ो से समझाओ तुम ।

नहीं है कोई बात मुझमें,
मेरी एक बात बन जाओ न तुम !!

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