हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।
संघर्ष के इन कांटों पर चलकर, मंज़िल का सीना चीरना होगा।
कभी गिरकर , कभी संभलकर।
कभी रो कर , कभी बिलखकर ।
मंज़िल के लिए तुम्हे लड़ना होगा।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।
याद करो तुम।
जब माता पिता ने तुम्हे पहली बार गोद मे उठाया होगा।
देखा होगा तुम्हारी आँखों में फिर कुछ ख्याल उन्हें आया होगा।
चुम कर माथा तुम्हारा कहा होगा उन्होंने,
जीवन के कष्टो को ये मिटाएगा ।
पसरा है जो इस ज़िन्दगी में अंधियारा,
चिराग बन कर ये अब मिटाएगा।
अब असफलताओ से डर कर रुक गए तुम,
क्या मुँह उन्हें दिखाओगे।
तुम्हारा अस्तित्व तुमसे सवाल करेगा,
बताओ न, क्या जवाब दे पाओगे।
पड़ोसियों के उन तानों को, अब तारीफों में बदलना होगा ।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।
चलो छोड़ दो मासूमियत,
फेक कर असफलताओ का तमगा जीवन सृजन में लग जाओ ।
क्रूर बनो ,लक्ष्य के खातिर
तप में बस तुम गड जाओ ।
छोड़ दो तुम अब दुनियादारी,
लक्ष्य आंखों से ओझल हो ना पाए।
सोच लेना अब के बाद तानें कोई कस ना पाए ।
गरजो तुम, एक आवाज बनो।
रोक सके न कोई तुफा , एक ऐसी परवाज बनो ।
बजा दो बिगुल, लक्ष्य के लिए एक रण हो ।
पल पल हो, क्षण क्षण हो ।
कटते रहो, टूटते रहो , रुके रहो , टिके रहो ।
लक्ष्य के लिए इस संघर्ष पथ पर टिकना होगा।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।।
हार नही सकते तुम।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।
संघर्ष के इन कांटों पर चलकर, मंज़िल का सीना चीरना होगा।
कभी गिरकर , कभी संभलकर।
कभी रो कर , कभी बिलखकर ।
मंज़िल के लिए तुम्हे लड़ना होगा।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।
याद करो तुम।
जब माता पिता ने तुम्हे पहली बार गोद मे उठाया होगा।
देखा होगा तुम्हारी आँखों में फिर कुछ ख्याल उन्हें आया होगा।
चुम कर माथा तुम्हारा कहा होगा उन्होंने,
जीवन के कष्टो को ये मिटाएगा ।
पसरा है जो इस ज़िन्दगी में अंधियारा,
चिराग बन कर ये अब मिटाएगा।
अब असफलताओ से डर कर रुक गए तुम,
क्या मुँह उन्हें दिखाओगे।
तुम्हारा अस्तित्व तुमसे सवाल करेगा,
बताओ न, क्या जवाब दे पाओगे।
पड़ोसियों के उन तानों को, अब तारीफों में बदलना होगा ।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।
चलो छोड़ दो मासूमियत,
फेक कर असफलताओ का तमगा जीवन सृजन में लग जाओ ।
क्रूर बनो ,लक्ष्य के खातिर
तप में बस तुम गड जाओ ।
छोड़ दो तुम अब दुनियादारी,
लक्ष्य आंखों से ओझल हो ना पाए।
सोच लेना अब के बाद तानें कोई कस ना पाए ।
गरजो तुम, एक आवाज बनो।
रोक सके न कोई तुफा , एक ऐसी परवाज बनो ।
बजा दो बिगुल, लक्ष्य के लिए एक रण हो ।
पल पल हो, क्षण क्षण हो ।
कटते रहो, टूटते रहो , रुके रहो , टिके रहो ।
लक्ष्य के लिए इस संघर्ष पथ पर टिकना होगा।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।।

No comments:
Post a Comment