Friday, 9 February 2018

फिर क्यूँ तुम्हारी याद आती है ??

फिर क्यूँ तुम्हारी याद आती है ??

मैं तो तुम्हे भूल जाना चाहता हूँ ।
 फिर क्यूँ तुम्हारी याद आती है??
क्यूँ मुझे रुलाती है?
आखिर क्यूँ तड़पाती है ।
सोचना भी नही चाहता मैं जिन लम्हो को,
बताओ न तुम, ये यादें क्यों वहां बार बार ले जाती है ।
फिर क्यूँ तुम्हारी याद आती है ??

धड़कने तुम्हे याद करती है, सांसे तुमसे वापस आने की फरियाद करती है ।
जिया है हमने जिन पलों को एक साथ,
आ आ कर याद मुझे बर्बाद करती है।
मैं पाना चाहता हूँ तुम्हे,
जानता हूँ मुमकिन नही,
जीना चाहता हूँ  फिर से उस लम्हों को, मुश्किल ही सही ।


नहीं, मत आना तुम अब मेरे पास ।
मैं जी लूंगा यादों के सहारे ।
कभी रो कर, कभी चुप हो कर ।
कभी खामोशियों को जी कर, कभी तेरे सपनो में होकर ।
नहीं देख सकता तुम्हें दुसरो की बाहों में,
पर न जाने क्यों ये आंखे तेरी खातिर तरस जाती है।
मैं तो तुम्हे भूल जाना चाहता हूँ ।
 फिर क्यूँ तुम्हारी याद आती है ??

जानता हूं, अब लाख जतन कर भी तुम्हे पा न सकूँगा।
होगी तुम सामने तो भी अपना ना सकूँगा।
रोएगी आंखें , तरसेगी निगाहें।
धड़कता रहेगा दिल, बहुत याद आएगी तुम्हारी प्यारी बातें ।
पर अब मैं फिर से टूटना नही चाहता।
समेटा है बिखरे ज़िन्दगी को, फिर से बिखेरना नही चाहता ।
जब ख्याल ही नही रहा मेरा
फिर messages मे क्यों मेरा हाल पूछ जाती  हैं ?
मैं तो तुम्हे भूल जाना चाहता हूँ
फिर क्यूँ तुम्हारी याद आती है ??
आखिर क्यों याद आती है?
बताओ न, क्यों याद आती है ??

3 comments:

  1. Replies
    1. Ya, truly it is. But for only those who has lost their love.

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  2. Thank you so much for the appreciation.

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