Thursday, 29 December 2016

कहीं खो न जाएं हम .....

कभी कभी सोचता हूँ तो थोड़ा अजीब लगता है। और सच्च पुछीए तो है भी। बचपन से , मतलब almost तीन चार साल से हमारे माँ  बाप हमारे पढ़ाई को लेकर चिंतित हो जाते है । अब उनके सपने उनके बच्चों  मे बस जाते हैं । जो काम वे न कर पाए वो चाहते हैं की उनके बच्चे करे । कोई  doctor बनना चाहता था कोई engineer । कोई lawyer तो कोई professor । सपने थे सबके ।और उनके उन सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी आ जाती है उनके  बच्चों पर । और इसमे कोई गलत नहीं है ।कभी कभी सोचता हूँ तो थोड़ा अजीब लगता है। और सच्च पुछीए तो है भी। बचपन से , मतलब almost तीन चार साल से माँ  बाप बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित हो    जाते है । अब उनके सपने उनके बच्चों  मे बस जाते हैं । जो काम वे न कर पाए वो चाहते हैं की उनके बच्चे करे । कोई  doctor बनना चाहता था कोई engineer । कोई lawyer तो कोई professor । सपने थे सबके ।और उनके उन सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी आ जाती है उनके  बच्चों पर । और इसमे कोई गलत नहीं है ।लेकिन कभी कभी सोचता हूँ की ये बच्चे  तीन चार साल से किताबों से भरे बैग को अपने नाजूक से कंधों पर लेकर इसलिएसुबह से शाम , स्कूल से कोचिंग इसलिए घूम रहे हैं की कल के दिन वो किसी का नौकर बन सके । किसी company मे engineer  हो जाएं । किसी कॉलेज में professor । किसी बड़े firm मे वकील बन सके तो कहीं  CA ।बहुत कम होते हैं ऐसे अभिभावक जो अपने बच्चों को ये छूट दे पाते हैं की जा तुझे जो करना है वो कर । और बहुत ही विरले होते है बच्चे भी जो कुछ out of the box करते हैं, कुछ अलग सोचते हैं ।आज भी लोग सरकारी नौकरी के लिए पागल हैं । कोई नहीं हिम्मत कर पाता अपनी new start  up  के लोए । कोई नहीं सोचने की हिम्मत कर पाता अपने नए unique  business plan को implement करने का। और ये जानते हुए भी की अगर उसने वो किया जो वह करना चाहता है तो वह जरूर सफल होगा । अगर उसने वह किया जो वह करना चाहता है तो भले वह successful  नया हो, लेकिन ज्यादा खुश रहेगा । लेकिन फिर भी नहीं कर पाता । जानते हैं क्यूँ ??क्यूंकि उसे डर है की कल के दिन मे अगर वह fail हो गया ना  तो सारे लोग उसे जिम्मेदार मानेंगे । क्यूंकि उसमें वह ताकत नहीं की वह लोगों के ताने बर्दास्त कर पाए । क्यूंकि उसे डर है की लोग उसे बारे मे क्या कहेंगे, जब वह फेल हो जाएगा ।और इसीलिए हम लोग बस ordinary बन कर रह जाते हैं । और जो लोग इन सारे बाधाओं, इन सारी मानसिकता से आगे निकलकर , लोगों की बातें अनसुना कर अपने सपनों को गढ़ने के लिए आगे निकाल जाते हैं ना , एक दिन हम भी लोगों के हुजूम मे खड़ा होकर उनके लिए तालियाँ बजाते हैं । उनकी सफलता पर अचरज प्रकट करते हैं । उनकी उपलब्धियों को सांस रोककर सुनते हैं और वाह वाह करते हैं । और शायद इस तरह हम एक सफल व्यक्तित्व जिसकेलिए पूरी दुनियाँ को तालियाँ बजनी चाहिए , हम मार देते हैं ।हजारों मिल जाएंगे आपको, हजारों।शायद आप भी हों , और मै भी ।

Ravi Ranjan Yadav



1 comment:

  1. Shi hai life me jo krne ka andar se desire hai use kisi bhi kimat me krna chaiye. Log to mahatma gandhi jaise mahapurrush k bare me bhi buri baten krte hain jo satya or ahinsa k marg pr chalte the. To hm pr bhi log bolenge lekin jo bol rha hai usko bolne do hme apna kam kr k rhna hai.
    True lines Ravi

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