Saturday, 25 February 2017

एक दर्द जिसने बना दिया I A S Officer !!






दर्द , हमेशा हानिकारक नहीं होता । हाँ पीड़ादायक होता है । लेकिन हर पीड़ादायक चीजें हानिकारक हो ऐसा भी तो नहीं है न ।
जब हमे कभी चोट लगती है, जब हम कभी गिर जाते है। जब कभी हम fail हो जाते है , जब कभी हम हार जाते है । जब कभी हमारे according  नहीं होती चीजें, जब लोग गलत कर देते है हमारे साथ । दर्द तो होता है । बहुत दर्द होता है  । असहनीय ।
और इन दर्दों  का परिणाम कुछ ऐसा होता है की कुछ लोग चलना छोड़ देते है, कुछ लोग रुक जाते हैं , कुछ टूट जाते हैं । पता नहीं होता की अब क्या करूँ  आगे/? कैसे करूँ ?? किससे  पूछूँ ??
और इस तरह बिखर जाते हैं  कुछ लोग ।
लेकिन कुछ वैसे भी लोग होते हैं , जो रुकते नहीं है। ज़ो  झूकते  नहीं है  टूटते नहीं हैं , infact उन्हे टूटना ही नहीं आता । रिकार्ड तोड़ना जानते हैं वे । जान लगाकर मेहनत  करते हैं ।
 ऐसा नहीं है की उन्हे दर्द नहीं होता । होता है । बहुत। लेकिन वे धीरे धीरे उस दर्द से पर पाना  सीख   जाते हैं । गिरते हैं  उठते हैं और चलते जाते हैं ।
लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं विरले,जो उस दर्द को अपने मन मे,  अपने दिल मे,  अपने दिमाग मे सँजो कर रखते हैं और यही वो दर्द होती है जो उन्हे उस मुकाम तक ले जाती है, जो शायद किसी ने नहीं सोचा होगा।
और वो सीखा जाते हैं हमे कि अगर ज़िंदगी में कभी दर्द मिले न, कभी ठोकर मिले न , कभी rejection मिले, कभी insult  मिले तो घबराना नहीं । ससम्भाल के रखना इन यादों को । धरोहर हैं ये। यही help  करेंगी आपको । ये चीजें सोच सोच कर रोने के लिए नहीं है , ये आपको मजबूत बनाएंगी । ।
दर्द, तिरस्कार और बेइज्ज़ती की कुछ ऐसी ही कहानी है गोविंद जायसवाल  की।
एक  real life  कहानी । 
बचपन में ऐसे ही खेलत्ते खेलते गोविंद अपने किसी दोस्त के घर मे घुस गए थे ।  उनके दोस्त के पिता ने उनके अपने यहाँ घुस जाने पर बड़े अचरज के साथ देखा और डांटते हुए कहा कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमारे घर में घुसने की ।
कुछ साल के गोविंद को ये सारी बातें बिल्कुल समझ नहीं आई । उन्होंने अपने से बड़े किसी से इसका मतलब पूछा कि आखिर उसने ऐसा क्यू बोला??
उतर मिला-देख तू गरीब है न , एक रिक्शे वाले का बेटा है ,समाज के निचले तबके से आता है  इसलिए ऐसा बोला ।
गोविंद ने पूछा :- मै समाज के उपरे तबके में कैसे आ सकता हूँ ??
उतर मिला :-देख तू कुछ ऐसा कर जो बाकी ये सभी लोग नहीं कर सकते । तू आईएएस के लिए try कर । यही ये जॉब है जिससे आगे कोई नहीं निकल  सकता । भारत कि सबसे बडी पोस्ट मिलती है इसमे । ।
और तभी से,सिर्फ तभी से गोविंद के मन मे बस IAS  ही चल रहा था । गोविंद बताते हैं कि " लोग 9th , 10th करने के बाद बहुत सारी चीजों के बारे मे सोचते हैं ,मै  सिर्फ आईएएस सोचता था । कोई भी क्या कर रहा है, क्या सोच रहा है इससे मुझे कोई फर्क  नहीं  पड़ता , मै सिर्फ अपने धुन  में अपना काम करता चला गया । ऐसा नहीं है कि बाधाएं नहीं आई इस सफर में, आईं । लेकिन दिल मे कुछ कर गुजरने का जज्बा था और दिल मे धधकते उस आग में सारी बाधाएं जल कर खाक हो गईं । मेरे पापा रिक्शा चलाते हैं जब मैंने पढ़ना शुरू किया तो लोग कहते थे पढ़ लिख कर ज्यादा से ज्यादा क्या कर लोगे एक रिक्शा  है, दो और खरीद लोगे । एक तुम चलाओगे और एक दूसरों से चलवाओगे  । "
गोविंद अपने पुराने दिनों को याद करते हुए भावुक  हो उठते हैं  । वो बताते हैं ,"जब मेरी दीदी ने पढ़ाई करने कि शुरुआत की थी तो लोगों ने ताने मारने शुरू कर दिए  । इसे तो किसी के घर मे झाड़ू पोंछा का काम करना चाहिए , बेकार पढ़ाई लिखाई कर रही है ।
गोविंद आगे बताते हैं , तैयारी के दिनों में बड़ी दिककते आईं। एक ही रूम मे हमें रहना पड़ता था । कभी कभी चाय तक पीने को पैसे नहीं होते थे । एक बार तो कुछ ऐसा हुआ कि पूरे महीने के लिए सिर्फ उनके पास 150 रुपए ही थे । और भी अनेक कठिनाइयाँ थीं जिसने गोविंद का रास्ता रोकने की कोशिश की , लेकिन उनके हौसलों से मात खाकर बिखर गईं ।
और finally  जब गोविंद  का selection  आईएएस के लिए हुआ तो उनकी तारीफ करने वालों मे से वैसे अधिकतर लोग थे जिन्होंने कभी उन पर शक किया था । उनके गुण गान  करने वालों मे से अधिकतर वैसे लोग थे जिन्होंने कभी उन पर ताने कसे थे । उनके पिता को जो लोग एक rikshe वाले की नजर से देखते थे , आज वही लोग उन्हे एक आदर्श पिता के रूप में देख रहे थे । ऐसे बदलती है दोस्तों लोगों कि मानसिकता । ऐसे , मिनटों में change  होता है लोगों का नज़रिया हमारे लिए । बस एक सफलता , और पूरी दुनियाँ आपके साथ । आपके demerits भी  merits बन जाते हैं । आप हीरो बन जाते हैं । हाँ , लेकिन इस एक दिन कि कीमत तैयारी के समय बीते गए हजारों घंटों की होती है , हजारों तानों की होती है, अनेक काली रातों की होती है , और अनेक दर्दों की होती है , तब जाकर मिलती है हमे असली सफलता । और तब ठोंकते हैं लोग सलामी ।  और हाँ तब तक आपको तिरषकृत किया जाता रहेगा जब तक आप सफलता की रोशनी से लोगों को चकाचौंध नहीं कर देते ।  इसलिए और भी जरूरी हो जाता है हमारा सफल होना । ।









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