कभी कभी जब हम टूट जाते हैं , जब हारने लगते हैं हम । जब doubt करने लगते हैं सब हमारे capability पर ।
जब बस तिरष्कार ही मिलता है हमें । जब कोई नहीं विश्वास करता हम पर । जब कठिन लगने लग जाते हैं सारे रास्ते । ऐसा समय होता है वह जब हम खोने लग जाते हैं अपने आप को । जो भी capabilities होती हैं हमारे अंदर, doubt होने लगता है हमे उन पर भी । जिस चीज में, जिस काम में हम निपूण होते हैं वहाँ भी perform नहीं कर पाते हम ।
ऐसा लगने लगता है जैसे अब कुछ बचा की नहीं हमारे अंदर। हम doubt करने लग जाते हैं अपने existence पर, अपने अस्तित्व पर । हम टूट जाते हैं अंदर से । गिर जाते हैं सबकी नज़रों में ॥
और ऐसे समय मे कोई आता है, जो हममे एक आशा की किरण जागा जाता है । वो हमे गले लगाकर , थपकी देते हुए कहता है की तुझमे है capability , करेगा तू जो तूने सोचा है। विश्वास है मुझे तुझ पर । और जब ऐसा होता है हममे एक नई सी ऊर्जा आ जाती है । और वो इंसान हमे हमेशा हमेशा के लिए याद हो जाता है। और सच्च में इंसानियत इसे ही कहते हैं । जब भी कभी हारे हुए, गिरे हुए, मायूष लोगों से मिले तो एक ऊर्बार थपकी देकर बोले भाई तू कर लेगा । चल आगे बढ़ । ।
हो सकता है की इस थपकी की, इस थोड़े touch की importance आपके लिए कुछ न हो लेकिन जिसे मिलती है , उसका लाइफ change हो सकता है । ।
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