दिल में जो दर्द ले कर चल रहे हो, उसे निकालते क्यूँ नहीं??
बिखर गई है अगर ज़िंदगी ,
तो उसे क्यूँ संभालते नहीं ?
क्यूँ उखड़े उखड़े रहते हो
क्यूँ यूं चुप चुप से जीते हो ?
क्यूँ नहीं कहते किसी से दिल की बात ??
क्यूँ तुम मन ही मन जज़्बातों के घूट पीते हो ??
क्या कोई सपना रह गया है??
क्या कोई अपना छोड़ गया है??
क्या गम है ?
क्या टूटा कोई कसम है ??
अगर टूट ही चुके हो ज़िंदगी में ,
तुम एक बार जोरों की दहाड़ क्यूँ मारते नहीं?
दिल मे जो दर्द ले कर चल रहे हो , उसे निकालते क्यूँ नहीं ??
बिखर गई है अगर ज़िंदगी ,
तो उसे क्यूँ संभालते नहीं ?
क्यूँ उखड़े उखड़े रहते हो
क्यूँ यूं चुप चुप से जीते हो ?
क्यूँ नहीं कहते किसी से दिल की बात ??
क्यूँ तुम मन ही मन जज़्बातों के घूट पीते हो ??
क्या कोई सपना रह गया है??
क्या कोई अपना छोड़ गया है??
क्या गम है ?
क्या टूटा कोई कसम है ??
अगर टूट ही चुके हो ज़िंदगी में ,
तुम एक बार जोरों की दहाड़ क्यूँ मारते नहीं?
दिल मे जो दर्द ले कर चल रहे हो , उसे निकालते क्यूँ नहीं ??
Behtarin sir
ReplyDeleteThank you so much for the appreciation.
Deletevery nice Ravi, today first time I am reading your blogs and you are doing really great job brother. keep it up.
ReplyDeleteSanjeev Dwivedi
Sanjeev sir, Thank you so much for the appreciation, and ofcourse al the time.
ReplyDelete