Tuesday, 2 January 2018

गाँव की गोद में ।। Ravi Ranjan Yadav


इंदौर की व्यस्त ज़िन्दगी से दूर, और 4 साल की engineering की खूबसूरत ज़िंदगी के बाद, रांची की उन यादों को छोड़कर कलकत्ता , पटना होते हुए आज गांव  की गलियों में जैसे ही पहला कदम पड़ा , बचपन के एक एक किस्से डायरी के पन्ने की भांति खुल खुल कर सामने आने लगे । कभी बचपन के यादों से जुड़ा वो आम का पेड़ सामने आ गया, तो कभी हमारे आतंक से परेशान वो करंज का पेड़ शिकायत करने लगा। वो महुआ का पेड़ जहां हम बड़ी देर तक बैठ कर बदमाशियां करते थे, बड़ी खुश हुआ था आज। ऐसा लग रहा था जो जिंदगी हम 12 साल पहले छोड़कर चले गए थे वो फिर से वापस आ गया हो । ऐसा लग रहा तब जैसे नियति हमे मौका दे रही हो हो कि जी लो फिर से वो ज़िन्दगी जो तुम ज़ी नही पाए । एक एक करके लोग मिले । बहुत दिनों के बाद । ऐसा लग रहा था जैसे ये लोग नही , रिश्ते मिल रहे थे। वैसे रिश्ते जिन्हें 12 साल पहले छोड़ आए थे हम। वैसे रिश्ते जो लगभग भूल चुके थे हमे । हाँ मगर एक बात थी , इतने समय की दूरियीं को पाटने के लिए वो 3-4 दिन की छुट्टी काफी थी।
इन 3-4  दिनों में ही शायद 3-4 वर्ष जी आए थे हम! 
लेकिन सोचता हूं मैं कभी कभी। क्यों आखिर हम भूलने लगते है उस जगह को जिसने हमे अपने गोद मे खेलाया , क्यों छोड़ जाते हैं हम उस जगह को जहां हम पले बढ़े ।
क्यों हमे कमी लगने लगती है उस जगह में आखिर ?
क्यों नही रहना चाहते हम वहां ।
क्यों सब अपनो को छोड़ कर पराया  लोगों के बीच रहने में गर्व होने लगता है हमे  ?
क्यों??
मैं बताता हूं ।
क्योंकि हमें दूसरे जगह रहने पर इज़्ज़त महसूस होती है।
क्योंकि अगर हम दूसरे जगह पर रहे तो लोग एक अलग ही respect के सथ देखते है हमें ।
क्योंकि हम में इतनी हिम्मत नही है कि हम अपनी एजुकेशन को पूरा करने के बाद अपने ही जगह पे कुछ ऐसा plan करें कि हमारे साथ साथ हमारा वो जगह भी आगे बढ़े। स्वार्थी हो गए है हम । अपनी सोचते हैं । डरपोक है हम । इतनी सी हिम्मत नही कि दूसरों की नौकरी छोड़कर कुछ अपना ठान सके । कुछ अलग कर सके। कुछ अलग सोच सके । Negative हो चुकी है अपनी mentality। अगर कोई एजुकेशन कम्पलीट करने के बाद फिर से वही आकर कुछ करने को सोचता है तो taunt मारने से नही चूकते हम । failure दिखता है हमे ।
शायद सुधर जाए हम दोनों तरह के लोगों की मानसिकता । शायद । हमे कोई शर्म महसूस ना ही अपना कुछ start up करने में। अपने लोगों के बीच।
चाहे कोई कुछ भी कह दे ।
और अगर कोई ऐसा करे तो उसकी रेस्पेक्ट हो हो मन में। सपोर्ट करें हम ऐसे कर्मवीरों को। और अगर हम ऐसा कर पाए तो शायद हर जगह को एक अच्छा जगह बना पाएंगे हम।
करेंगे ना आप ऐसा ??
करिएगा जरूर ।।
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