Thursday, 4 August 2016

खुद पर ऐतबार कर .. Er Ravi R Yadav

क्यों भरोसा करता है गैरो पर,
जानता  है न तू,
चलना है तुझे खुद के पैरो पर  ।।





स्वार्थी है दुनिया । चाहे कोई कितना भी अपना जताता हो कि वो आपका बहुत अपना है,एक दिन ऐसा आएगा की वो आपको छोड़ कर चला जाएगा। कोई भी आपके साथ तब तक है जब तक आप उसके कोई काम आ रहे है।सच्च है यह।
मै  बेवजह नकारात्मक नहीं हो रहा हूँ । एक दिन ऐसा आता ही है जब आपको खुद के पैरो पर चलना होता है। खुद के बाजुओ पर यकीन करना होता है। खुद को संभालना होता है। खुद को दिलाशा देना होता है क्योंकि ऐसे समय में कोई आपके आस पास नहीं होता।
खुद ही उठना होता है हमें ।खुद ही लड़ना होता है अपने हालातों से,अपने दुःख ,दर्द ,अपने आंसुओ से। हर मोड़ पर लोग खड़ा होते है आपके क्षमता पर शक करने के लिए।
आपको नीचा दिखने के लिए। और खासकर उनमे वैसे लोग भी होते है न जिन्हें आपने कभी सभाला था। वो लड़खड़ाते थे तो अपने चलना सिखाया था ,तो दिल को थोड़ी चोट लगती है।
लेकिन छोड़िए उनलोगो को। उन सारे लोगों को। हमें तो मालूम है न हमें क्या करना है ??
हमें तो पता है न कि हम गिरेंगे तो कुछ लोग तालियां भी बजाएंगे।
लेकिन सच्चाई भी यही है की यही होते है वे लोग जो आपके सफल होते ही पुरी दुनिया को बताते है की वो आपसे कैसे मिले ??

कि उन्हें तो पता ही था की आप सफल होंगे।।आपके तारीफों के पूल भी वही बांधते नज़र आएँगे जिन्होंने कभी आपकी कमियां गिनाई थी ।
तो हमें क्या करना है??
कुछ नहीं। बस  इन अँधेरी रातों से आशिकी करनी है। किताबो से प्यार करना है  ।लोगो को करने देनी है हमारे बारे में बातें। उड़ाने दो उन्हें हमारा मज़ाक। सह लेंगे हम।
जब सारी दुनिया सोने में,मस्ती करने में, घूमने में ,यहाँ वहां जाने में ब्यस्त है ,हम अपने सपनो के खातिर संघर्षरत रहेंगे। एक एक कमजोर कड़ी को जोड़ेंगे हम। मजबूत बनाएंगे हम अपने आप को।झोंक देंगे हम अपने आप को तपश्या की अग्नि में। और इंतज़ार करेंगे उस पावन घड़ी का जब हमारे माथे पर भी जीत का सेहरा बंधेगा। जब हम भी सीना तानकर चलेंगे । जब हम भी अपने माता पिता को एक गर्व करने का कारण दे पाएंगे। और वो भी एक सच्चे रास्ते पर चलकर । कीसी का इस्तेमाल करके नहीं। किसी को दर्द देकर नहीं। किसी को बुरा महसूस करा कर नहीं।
बिलकुल सही तरीके से।
अपनों को साथ लेकर।
पहुचेंगे हम सब एक दिन अपनी मंज़िल पर।
आएगा वो दिन।।
जरूर आएगा ।।
बस हमें खुद पर ऐतबार करना होगा ।।

(दोस्तों, इससे पहले कि आप मुझसे पूछे कि मै कौन हूँ ??  क्या मैंने कुछ किया है?? क्या मैंने सफलता की कुछ मिसाल कायम किया है??
तो दोस्तों, मेरा उत्तर शायद आपको निराश करे  ।लेकिन सच्चाई यही है कि मैंने अभी तक कुछ वैसा नहीं किया जिसे एक मिशाल  कहा जा सके।  मै भी एक राही हूँ,मंज़िल के तलाश में हूँ। कोई  खास लेखक नहीं हूँ ।दिल की बातें लिखता हूँ।आपके ही तरह दिल में ये द्रिढ़ विश्वास लिए हूँ की एक दिन जो मैंने सोचा है वो जरूर होगा।
तो वास्तव में आपका एक साथी हूँ मै ,सब साथ चलेंगे हमलोग मंज़िल के लिए।)

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