Saturday, 13 August 2016

कभी मिलो तो मुस्कुरा देना !!!!!

कभी मिलो तो मुस्कुरा देना ,
बस इतनी सी बात काफी होगी ।
जानता हूँ मै मुक़मल नहीं तेरी चाहत
मुझ जैसे बदनसीब के नसीब में
कभी छेड़ जाना तुम मुझे मेरे सपनो में आकर
मेरी इतनी सी नसीब काफी होगी।।
भले भूल जाना तुम उन सारी बातों को
शाम के उन वादियों को
सावन के बरसातों को
छोड़ जाना तुम मुझे दर्द में तड़पते ,आंसुओ से लिपटे हुए
तेरी ये भेंट मेरे लिए सबसे न्यारी होगी
कभी मिलो तो मुस्कुरा देना,
तेरी इतनी सी बात काफी होगी ।।
कभी चाहा था तुझे टूटकर
दिनभर तेरी यादों में खोया रहता था,
सपनो में आओगी तुम
सोचकर दिन भर सोया रहता था ।
कितने अच्छे थे वो दिन ,तुम रूठती थी
मै मनाता था
तेरी एक फरमाइश पर ,गला फाड़ चिल्लाता था ।
क्या बकवास गा रहे हो,सुनकर मै चुप हो जाता था,
तुम्हारे गले लगाते ही मै बच्चों सा खुश हो जाता था।
आज तुम किसी और को गले लगाती होगी ।
कभी डराती होगी,कभी धमकाती होगी ।
रोता होगा वो तो तुम अजीब सी शक्ल बना कर ,तुम उसे हँसाती होगी  ।
सोचता हूँ मै आज
कितना खुसनसीब होगा वो,
जिसे तुम इतना सताती होगी ।।
जानता हूँ ,
बड़ी दूर जा चुकी हो तुम मुझसे
फिर भी तुम्हे इस दिल के करीब पाता हूँ
आओगी तुम अपने सच्चे प्यार के पास,
इस टूटे दिल को समझाता हूँ।
आना तुम ।।
फिर साथ हसेंगे,साथ रोएंगे ।
साथ लड़ेंगे ,साथ चलेंगे ।
साथ जिएंगे, साथ मरेंगे ।
और न आओगी तो,
कभी मिलो तो मुस्कुरा देना,
तेरी इतनी सी बात,
बस इतनी सी बात,
बस इतनी सी बात काफी होगी ।। ।।
                        (रवि रंजन यादव)

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