Wednesday, 7 December 2016

ज़िंदगी के चार साल नहीं , चार साल की एक ज़िंदगी है Engineering ।।



हाँ , यहाँ ज़िंदगी के चार साल नहीं  चार साल की एक ज़िंदगी निकलती है । इंजीनियरिंग कॉलेज है यह । चार साल में लोगों की जान बस जाती है यहाँ । एक अजीब सा लगाव हो जाता है , एक अजीब सी बंधन में बांध जाते है लोग । और जैसे जैसे कोर्स खतम होने का समय आता है , दिल में धीरे धीरे एक दर्द की शुरुआत हो चुकी होती है । ऐसा लगाने लगता है की वो चेहरे जिन्हे देखकर हर रोज की शुरुआत होती थी और हर रोज का अंत , नहीं मिलेंगे अब । याद आने लगती हैं एक एकu बातें ।सहसा ही जीवीत हो उठती हैं सारी यादें ।First semester  से लेकर आज तक का दिन आँखों के सामने ऐसे घूम जाता है जैसे कल ही की बात हो .  जैसे कल ही हुआ हो हमारा admission  .  जैसे कल ही मिले हो हम सब । जैसे कल ही पढे हो हम सारे सिमेस्टर । जैसे कल ही था पहला tech  fest । जैसे कल ही हमने लगाया हो हमने पहला proxy  अटेन्डन्स । जैसे कल ही प्लान करके हमने ग्रुप बंक किया हो । जैसे कल ही शरीक हुए हो हम फ्रेशर्स पार्टी में ।  जैसे कल ही शुरू  हुआ हो सबकुछ , और आज खत्म । ।


याद आतें    है एक एक दिन पहले दिन से लेकर आज तक ।  कैसे पहले दिन हम अपने चारों ओर खूबसूरत चेहरों को देखकर  खुश हो गए थे । कैसे कुछ लोग कुछ आँखों को देखते ही उनकी गहराई में खो गए थे ।
कैसे कुछ लोगों ने ठान ही लिया था कि बस वही पिंक ड्रेस वाली ।
कैसे भी ।
किसी भी कीमत पर .
वो नहीं तो कोई और नहीं ।   और कैसे आपके उस दोस्त ने चक्कर मारना शुरू कर दिया था पहले दिन से ही ET &T ,  CIVIL  और CSE  के चारों ओर  । कैसे वो आपके तरफ से थर्ड column के second bench पर बैठने वाली लड़की के कारण आपके उस दोस्त का बैक लग गया था ।  पूरा फर्स्ट semester ही अलग अलग था सभी के लिए । कुछ लोगों के लिए , अपने कुछ खास लोगों से मिलन था । कुछ लोगों के लिए अपने आप को कॉलेज में project  करना  था । कुछ लोगों को टॉप करना था  । कुछ को मस्ती  ।  कुछ लोगों को घूमना फिरना था और कुछ कुछ लोगों को पता भी नहीं था सायद की करना क्या है  ??
और हाँ कुछ, मेरे जैसे लोग भी थे । अपनी दुनियाँ   मे रहने वाले ।

फर्स्ट सिमेस्टर के इग्ज़ैम के बाद जैसे ही second semester की शुरुआत होती है , एक अजीब सी पागलपन होती है लोगों में फर्स्ट सिमेस्टर के रिजल्ट को लेकर । इतनी ज्यादा की उतनी तो फिर वो प्लैस्मन्ट के रिजल्ट को लेकर भी परेशान नहीं होतें । आखिर हो भी क्यों न , यही first semester का ही रिजल्ट होता है  जिसके basis पर आप या तो teachers  के नजर में हीरो बनते है या फिर विलन  । पहले semester के टापर पहली बार सायद celebreity वाली फीलिंगस फ़ील करते है और शायद आखिरी बार । हाँ हाँ , आखिरी बार । वो इसलिए की फिर उन्हे भी पता चल जाता है कि  एक engineering कॉलेज में toppers की क्या इज्जत रहती है । यहाँ तो अलग ही rule होता है । जिसके जीतने backlogs वो उतना dude । Toppers को तो अलग ही प्राणी consider कर लिया जाता है।
हाँ , लेकिन एक बात और है । first semester का result  कुछ खास होता है । यही वो रिजल्ट है जिसके कारण कुछ लोगों की बादशाहत शुरू   शुरू होती है जो की पूरे engineering तक चलती है । एक बार अच्छा result आ जाए और बस आप टेयचर्स के favourite बन जाते हैं । और फिर life आसान हो जाती है । और यही वो result  है जो कुछ लोगों को विलेन बना देता है  , जो अपने को सेलीब्रैटी समझा करते थे  ।  हाँ एक और चीज, ये first sem की result  कुछ लोगों के love express  को भी एक thrust  provide  करती है  ॥

थर्ड semester तक आते आते एक जो वो excitement  वाली फीलिंगस होती है वो almost खत्म होने लगती है । अब शुरू होता है इवेंट्स का दौर  । फ्रेशर्स पार्टी, teachers day, Tech  fest , CTs , Exams  होते होते कैसे पूरा सेकंड year  निकलता है, बिल्कुल पता ही नहीं चलता ।  थर्ड year  भी यूं ही निकाल जाता है।


अब आता है 4th Year  ।
Last  year  of  the  Engineering life ।
4th  year  का पहला क्लास हुआ नहीं की घर से फोन आना शुरू । बेटे कंपनी  आ रही है क्या कोई प्लैस्मन्ट के लिए??
कब??
क्या है Package  ??
परेशान हो जाते है सब । Parents भी , हम भी । आखिर हो भी क्यों  न ?? लाज़मी है परेशान होना । आखिर यही तो है जिसके लिए हमने ईतने दिनों   तक इंतजार किया है ।  लगभग 7थ sem तक सबकुछ ठीक रहता है । लेकिन जैसे ही हम 8th  semester  मे आते  हैं, टेंशन का लेवल धीरे धीरे बढ़ता जाता है ।  और सच बताऊ ये tension  इस कदर होता है जितना की पूरे engineering मे कभी न हुआ हो । । कुछ खुसनसीब होते हैं, जिनका placement  हो जाता है । और कुछ वैसे जिन्हे किस्मत ये मौका देती है की तू लड़ । लड़ अपने बुरे दिनों से, अछे दिनों क लिए । और वे जीतते है, आज नहीं तो कल । । लेकिन सच मे आसान नहीं होता ये कि आप college से passout हो रहे हों और आपके पास एक भी जॉब न हो । हाँ लेकिन ये भी है कि आप चार साल के इस journey में इतना कुछ सीख जाते हैं कि ये सारी चीजें छोटी लगने लग जाती हैँ । आप बड़े बड़े problems से लड़ना सीख जाते हैं .


सच में जबआज पलटकर देखता हूँ, चार साल के engineering को तो दिमाग कहता है कि यहाँ चार साल निकले हैं ज़िंदगी के, और दिल कहता है कि ये ज़िंदगी के चार साल नहीं, चार साल की एक ज़िंदगी थी । जहाँ धीरे धीरे कुछ न कुछ हम सीखते गए । पेरेंट्स नहीं थे यहाँ पर, teachers थे। जब भी हम मायूस हो जाते हार जाते , हमेशा उनका साथ मिला ।  यहाँ  family members तो नहीं थे हमारे साथ, लेकिन कुछ दोस्त थे जिन्होंने उस कमी को पूरा किया । seniors थे कुछ हमारे जिन्होंने  आपको एक छोटे भाई बहन कतरह treat किया , जहां भी जरूरत  पड़ी हमेशा आपके साथ मिले वो । और हाँ कुछ juniors  होते है जो आपके दिल मे हमेशा के लिए बस जाते हैं, बिल्कुल छोटे भाई की तरह । कुल मिलाकर एक family है engineering college । एक ज़िंदगी है engineering  , जिसे जिसने भी जिया है, कभी भूल ही नहीं सकता किसी  और सच कहा जाए तो  कौन भूलना चाहेगा, भी कीमत पर .
याद आते हैं एक एक पल । एक  एक क्षण । जो हमने गुजारे थे दोस्तों के साथ । भूल नहीं सकते हजारों ऐसी बातें जो जब भी  याद आती है , मन में एक अजीब सी मिठास घोल देती है । और ले जाती है उस हसीन दुनियाँ में जिसे मै बहुत miss  करने वाला हूँ और शायद आप भी । है न??

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