Sunday, 22 January 2017

MDH की सफलता की कहानी । । Er Ravi R Yadav


चुन्नी लाल की दुकान ।

 जी हाँ , इसी नाम से जानते थे सारे लोग  इसे , जिसके स्वाद की मुरीद आज पूरी दुनियाँ हैं  , जिसके बिना आज हजारों लोगों के घरों में स्वाद का चठखरा नहीं   लग सकता  । और जिसके नाम लेते ही हमारे सामने लजीज खाने  और उसका स्वाद तैर जाता है । जी हाँ । बात हो रही है, MDH   मसाले  की। जितना स्वाद इस मसाले से बनी व्यंजनों मे होता है, उससे कहीं मजेदार है इस मसाले की सफलता की कहानी ।

पाकिस्तान के बंटवारे से पहले एक चुन्नीलाल   नामक व्यक्ति ने एक छोटे से दुकान की शुरुआत की थी  । वर्ष था 1919  और जगह थी सियालकोट , पाकिस्तान ।   मकसद साफ था कि कुछ ऐसा काम किया जाए जिससे  बस घर गृहस्थी का गुजारा हो जाए । घर मे जो गरीबी ने अपना पैठ बना लिया था, उससे थोड़ी निजात मिल जाए । बस यही सोचकर इस दुकान की शुरुआत की गई थी ।
कौन जानता था की यही छोटी सी दुकान कल हजारों दुकानों के  बराबर हो जाएगी ??
कोई भी नहीं । और कौन सोच सकता था की जिस घर में , घर के खर्च भी नहीं चल पा रहे उसी घर से बहुत सारी घरों की कमी पूरा होगी । 
कौन सोच सकता था की जिस घर मे खाने को दिक्कत चल रही हो, एक ऐसा भी दिन आएगा उस घर के लिए की उसका एक साम्राज्य ही स्थापित हो जाएगा।
कोई भी नहीं।
कोई नहीं । शायद उस छोटे से दुकान को खोलने वाले चुन्नी लाल भी नहीं।
लेकिन सोचा किसी ने ।
और शायद  पता था उसे सबकुछ।
 भले ही उसके पिता ने कुछ सोच न पाया हो उसने बहुत कुछ सोच लिया था । और उस  का नाम है... धर्म लाल गुलाटी  । और ये वही चुन्नी लाल के  बेटे हैं। धर्म लाल ने ठान लिया था कि जो दुकान उनके पिता  ने खोली थी , उस दुकान को बहुत आगे लेकर जाना है । तकलीफ़े आईं, जैसे  आतीं हैं , लेकिन धर्मपाल जैसे पहले से ही तैयार थे । एक एक कर सामना करते गए । संघर्ष के दिनों में बहुत कम लोग  थे उनके साथ, मगर जब कुछ दिनों के बाद सामने आए तो उनके पीछे पूरा कारवां था । चंद रुपैयों से शुरू हुई चुन्नी लाल की  दुकान "महाशियाँ दी हट्टी"  , 1500 करोड़ की  हो चुकी थी ।
और अब MDH के नाम से सारे देश मे स्वाद का चठकरा फैला रहा है । 

और इस success story के पीछे हाथ है सिर्फ और सिर्फ धर्म पल गुलाटी का । और मजेदार बात ये है कि बाकी सारी कॉम्पनियाँ promotion के लिए अपना poster boy ढूंढती है , धर्म लाल गुलाटी अपनी कंपनी के poster  boy खुद हैं, और इस साल यानी 2017 में उन्हे कंपनी ने बतौर सीईओ 21 करोड़ रुपए दी हैं । 92 साल उम्र होने के बावजूद वो अभी भी उतने ही लगन और उसी जज्बे के साथ कंपनी को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं ।













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