आज तक मुझे भी ऐसा लगता था कि मंदिरों मे भगवान की पूजा होती है । भगवान ही सर्वोपरी होते हैं,,बस उनकी ही महता होती है वहाँ । पूजारी बस भगवान के ध्यान मे ही लीन होते हैं । लेकिन नहीं ऐसा नहीं है । अब बदल गया है सबकुछ । । मंदिरों में अब पैसे की पूजा होने लगी है । पैसों को महत्व दिया जाने लगा है और वो भी बहुत ही ज्यादा ।
आप अब किसी मंदिर मे जाकर ये उम्मीद नहीं कर सकते की आपको ध्यान मे लगे हुए पंडित जी मिलेंगे । आप जो भी भेंट चढ़ाएंगे भगवान को, वो स्वीकार्य होगा । नहीं । नहीं है ऐसा।।
पिछले दिनों मुझे दो तीन मंदिरों मे जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जिसमे से कुछ तो पूरे देश मे प्रसिद्ध हैं । पहली थी रांची की पहाड़ी मंदि र , दूसरी उज्जैन की महाकाल की मंदिर और तीसरी ओंकारेश्वर की मंदिर । ।
इन सभी जगह जाने के बाद मुझे यह विश्वास हो गया की आखुर लोग भगवान से दूर क्यूँ जा रहे हैं । लोगों का भरोसा भगवान से, और पुजारियों से क्यूँ टूटता जा रहा है। वहाँ मैंने देखा खुले आम business किया जा रहा था । बड़े बड़े पंडित जी खुले आम लोगों से पैसे मांग रहे थे । अगर आपके पास पैसे नहीं हैं तो आपको दो घंटे लाइन मे लगकर जाना होगा दर्शन करने को। अगर आपके पास पैसे हैं तो सीधे जा सकते हैं आप दर्शन को। VIP बन जाते हैं आप । खुद बड़े बड़े पंडित जी लेकर जाते हैं आपको ।
अगर आपके पास पैसे नहीं हैं तो आप बस दूर से ही दर्शन कीजिए लेकिन अगर आप मालदार हैं तो आप एक दम नजदीक जाइए। भगवान के मुर्ती को स्पर्श कीजिए। फोटो खिचाइए। कोई मनाही ही नहीं है। या यही नहीं मैंने तो ये भी देखा की खुद पंडित जी फोटो क्लिक कर रहे थे और VIP पति पत्नी पोज़ दे रहे हैं। हाँ मैंने देखा है, खुद .। ।
दुनियाँ में हर जगह पैसे के basis पर भेदभाव होता है। मुझे लगता था कि काम से कम भगवान के घर को तो छोड़ेंगे लोग । लेकिन अब यहाँ भी नहीं । यहाँ भी पैसे वाले ही VIP हैं। और मैंने एक और चीज देखी ,, एक बूढ़ा सा आदमी को , पंडित जी से विनती करते हुए की उसकी तबीयत खराब है,, क्या उसे जल्दी दर्शन कराया जा सकता है??
पंडित जी ने रेट बताया 550 ₹ । जब उसने कहा की नहीं दे पाएगा उतना वो, तो पंडित जी ने लंबी लाइन की तरफ इशारा कर दिया ।
हर चीज के रेट fix हैं यहाँ । और आपको वैसे ही pay करना पड़ता है ।
इसीलिए अब कोई ढोंग नहीं करता मैं । प्रसाद में भी कुछ ज्यादा नहीं। जैसे मन करता है वैसे पूजा करता ह और वापिस आ जाता हूँ। और वैसे भी ये 500 ₹लेकर एक मिनट में हवन करने वाले पुजारी भी कौन सा नियम से पूजा करते हैं । तो अगर जब बिना नियम से, बिना proper तरीके से ही पूजा करनी है तो इन ढोंगियों को पैसे क्यू दिए जाएं । खुद से क्यूँ नहीं ??
और वैसे भी भगवान को, प्रभु को, ईश्वर को याद करने का कोई proper तरीका थोड़ी न होता है । ।
(नोट ::-- ये पोस्ट सभी पंडित जी और सभी पुजारियों के लिए नहीं है । ये सिर्फ ढोंगियों के विरुद्ध है। मैं खुद भी बहुत सारे पंडितों का हृदय से इज्जत करता हूँ। लेकिन ढोंगियों और पैसे खाने वालों का नहीं । एक सच्चे पुजारी की प्रतिस्ठा कभी कम नहीं होगी मेरे मन मे । कभी नहीं। लेकिन वो सच्चे हों । गुस्सा तब आता है हम youth को जब धर्म के नाम पर ढोंग होता है । )
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