Thursday, 11 May 2017

यादें,इन चार सालों के !!!


बारिश हो रही है आज । अपने घर के सामने  college दिख रहा है । ऐसे लग रहा है जैसे ये  बूंदों की बारिश नहीं , यादों की बारिश है । ऐसे लग रहा है जैसे ये बादल गरज कर ये बात रहें हो कि समय कहाँ लगता है वक्त को गुजरने में। । 
उस दिन भी हो रही थी बारिश । उस दिन भी गरज रहे थे बादल । लेकिन कौन जानता था की उस बारिश और इस बारिश के बीच इतना ज्यादा अंतर आ जाएगा । कौन जानता था की उस बारिश से झल्लाने वाले  इंसान को  कुछ सालों बाद वही  बारिश चार साल की यात्रा पर ले जाएगी  ।  उस समय हम पहली बार आ रहे थे अपने college.  ।
कुछ अलग दिन था वो। असमंजस भरा मन और ढेर सारी उम्मीदें, आशाएं ।  ऐसे लगता था जैसे कैसे कटेंगी ये चार साल ।ऐसे लगता था जैसे कब खत्म होगी ये इंजीनियरिंग । गिने चुने दो चार लोग और बस आप । जैसे जैसे कॉलेज की शुरुआत हुई, अनजान लोगों के मुसकुराते चेहरों के बीच से झाँकता हुआ वो अपनापन दिखने लगा । कभी notes के  बहाने, कभी assignments के बहाने, कभी कोई events के बहाने तो कभी बस यूं ही बिना कारण  के लोग पास आते गए। कुछ  लोगों से परिचय हुआ, कुछ अपने बने और कुछ खास हो गए  । कुछ ऐसे लोग भी मिले जिन्हे देखने के बाद हमे पहली बार लगा था जैसे , इनसे दूर ही रहो लेकिन अब दूर रह पाना उनसे संभव ही नहीं । कुछ ऐसे भी हुए जो अपने बने, खास हुए और फिर दूर चले गए । शिकवा नहीं है किसी से कोई आज । बस अब ऐसा लगता है जैसे अब फिर से सब साथ हो जाएं । यहाँ से जाने से पहले मिले एक बार दिलखोलकर । इन चार सालों मे जो सबसे bonding बनी है वो बस अब ज़िंदगी भर के लिए हो जाए ।
अब ऐसा लगने लगा है की placement ,personality, achievement, package, success  जैसे मामूली और temporary चीजों को बस ताक पर रख कर सोच जाए तो सबसे बड़ी चीज जो हमने यहाँ पाई है वो हैं हमारे फ़्रेंड्स । ऐसा लग रहा है जैसे यहाँ से जाने के बाद एकदम सुनी हो जाएगी ज़िंदगी। ऐसा लग रहा है जैसे किससे कही  जाएंगी सारी बातें । ऐसा लग रहा है जैसे अब किसकी उड़ाई जाएगी मज़ाक। ऐसा लग रहा है जैसे कौन  होगा वो जो मुश्किल घड़ी में शक्तिमान बन कर शाम को आएगा और शुबह तक सारी syllabus कम्प्लीट कराएगा । ऐसा लग रहा है जैसे कहाँ मिलेंगी वो placement के दिन  motivate करने वाले messages  । एक छोटे से achievement पर कौन मचाएगा शोर । कौन करेगा आपकी तारीफ।। और कौन मरेगा taunt ?? ऐसा लग रहा है जैसे खत्म हो रहा है ज़िंदगी का एक दौर । आज जब कुछ ही दिन बचे हैं यहाँ से जाने में याद आ रहे हैं एक एक दोस्त । ऐसा लग रहा है जैसे अभी सामने होते तो गले लगा लेता ।
कुछ दिनों के  बाद सब अलग अलग जगह जाएंगे । कुछ मिलेंगे कुछ दुनिया के इस भीड़ मे खो जाएंगे । और हाँ , कुछ तो ऐसे भी होंगे जिनसे हमारी ये मुलाकात , इस ज़िंदगी की आखिरी मुलाकात होगी । लेकिन एक बात तो तय है की जब भी मैं इन चार सालों को याद करूंगा, मै सबको बहुत मिस करूंगा । जब भी कभी किसी कॉलेज की बात आएगी, ये कॉलेज की यादें बहुत सताएगी । और जब भी मुझे अच्छा नहीं लगेगा , खोल लूँगा आप सब के फ़ोटोज़ अपने लैपटॉप में । देखता रहूँगा और याद करता रहूँगा आप सब के साथ बिताए हुए पल । और इस तरह मेरे होंठों पे एक मुस्कान आ जाएगी । अभी भी खुली है fairwell की  फ़ोल्डर और अभी भी याद आ रहे हैं आप सब । और हमेशा याद आते रहेंगे । हमेशा । शायद आप भूल जाएं  मैं नहीं भूल पाऊँगा । कभी नहीं ।
और हाँ दिल से thank you इन चार सालों के लिए ।




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