Monday, 28 November 2016

एक टूटे दिल की दास्ताँ । ।


क्या पुछा  था तुमने उस दिन , "क्या अब भी याद हूँ  तुम्हें ??"
अरे भूला   ही कब था तुम्हें । सामने वाला आपको भूल जाए इसका मतलब ये थोड़ी न होता है की हम भी उसे भूल जाएं । आज भी तुम उतनी ही याद आती हो जितनी की तब । आज भी  उतना ही प्यार है मुझे तुमसे जितना तब था, अलग  बात है कि अब तुम्हें  मूझसे नहीं। मत करो तुम ।लेकिन मै तो करता रहूँगा। आज भी जब आँखें बंद करता हूँ तो तुम्हें देखता हूँ। जब आँखें खोलता हूँ तो तुम्हें देखना चाहता  हूँ । हर घड़ी ,हर पल, हर क्षण बस तुम्हारा ही चेहरा होता है मेरे सामने, तुम्ही बस्ती हो मेरे दिल में । कैसे भूल सकता हूँ तुम्हें ???

और मै  क्या कोई भी कैसे 
भूल सकता है तुम्हें ??
तुम हो ही इतनी खूबसूरत। तुम हो ही इतनी हसीन । प्यारी हो तुम , बहूत प्यारी दिल से । पारियों से भी प्यारी, हसीनाओं से भी हसीन ।   भूल कैसे सकता हूँ तुम्हें ??


तूम  ही हो जिसने मुझे जीना सिखाया , तुम्ही हो जिसने मुझे मुझमे ही  विश्वास दिलाया उस समय जब मुझे सबसे ज्यादा जरुरत थी । तुम ही तो थी  जो हमेशा अपने से पहले मेरा रिजल्ट देखा करती थी । याद है तुम्हें तुम कितना खूश  हुआ करती थी जब मेरा मार्क्स तुमसे ज्यादा आया करता था । याद है तुम्हें ??  नहीं ?? हा तुम भूल सकती हो लेकिन मै  कैसे भूल सकता हूँ ??


हाँ । अभी भी आती हैं तुम्हारी यादें । हर घड़ी । हर पल । हर क्षण । हर जगह । हमेशा  । 
जब भी कभी बहुत खूबसूरत सी लड़की  को देखता हूँ तो   तुम याद आती हो, जब कुछ अच्छा देखता  हूँ तो तुम याद आती हो । जब कुछ अच्छा होता है तो तुम याद आती हो, कुच्छ बुरा  होता है तो तुम्हारी कल्पना कर पूछ लेता हूँ अब क्या करूँ  ?? शहर की हर गली हर चौक तुम्हारी  याद दीलाती है । कभी कभी तो मन करता है कि  बस भाग ही जाऊँ  मै  यह से । लेकिन नहीं भगता  । लेकिन नहीं भागता । बहुत कोशिश  की मैंने वजह जानने की लेकिन जान न  पाया । शायद इसलिए की यही वो जगह है जो मुझे कभी  तुम्हारे होने का एहसास करती थी । शहर   की इन्ही गलियों ने मुझे वो खुसनसब  बनने  का मौका दिया था  ।  इन्ही पार्कों में कैद है हमारी  तुम्हारी कुछ यादें जो अब सायद याद बनकर ही रहेंगी । ये यादें ही मुझे तुम्हारा  होने का एहसास कराती हैं । जानता हूँ बस कल्पना मात्र में ही संभव है यह लेकिन कभी कभी कल्पनाएं वास्तविकता से सुखद एहसास दे जाती है । सच कहूँ तो कभी भूल ही नहीं पाता तुम्हें  । और कभी  भूलना भी  नहीं चाहता  आखिर ये यादें ही तो है मेरे पास ,तुम तो अब .........


अब फिर से वैसा ही हो गया हूँ मै , जैसा तुम से मिलने से पहले था। शांत । चुपचाप। स्थिर ।तुम कहा करती थी न  ि क  हम इंसानों को समंदर जैसा बनना चाहिए, अंदर क्या चल रहा है पता ही नहीं चलना चाहिए ,अब बस वैसा ही बन गया हूँ मै ।  बिल्कुल वैसा । नहीं जाता कहीं घूमने , क्युकी जिसे घूमना पसंद था वो तो मेरे साथ   नहीं  है । नहीं जाता movies देखने । क्यूँ  जाऊँ ?? मेरी heroine  ही नहीं है अब मेरे पास । । उदासी ही मेरी सबब है । गम ही मेरा साथ ।  शाहेनशाह  बन गया हूँ मैं अब अँधेरों का , आँसुओ की ।


आज भी रहता  हुँ   अकेले । कभी याद आए  हमारी तो बस  एक बार आवाज देना ।  आज भी टकटकी लगे रहती हैं ये आँखें की कब तुम्हारा दीदार हो, आज भी एक आश है इस दिल को की तुम आओगी और आते ही गले से लगा लोगी । आज भी  खुश हो   जाता है ये मन की जब तुम आओगी फिर से तो कैसा लगेगा । संभाल नहीं पाता हूँ अपने आप को सोचकर उस दिन के बारे मे सोचकर । लेकिन मुझे संभलना भी नहीं । तुम रहो मेरे साथ बहुत ज्यादा काफी है मेरे लिए। ।

आना तुम ।।

इंतज़ार रहेगा तुम्हारा , मरते दम तक  ।।


(It is  completely imaginary, fictional artwork and it has nothing to do with anyone so please do not relate with anyone, specially me )

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