Sunday, 21 October 2018

इस लायक नही हो तुम ।।


इस लायक नहीं हो तुम
मेरे कुछ सवाल हैं,
जो सिर्फ क़यामत के रोज़ पूछूँगा तुमसे
क्योंकि उसके पहले तुम्हारी और मेरी बात हो सके
इस लायक नहीं हो तुम
मैं जानना चाहता हूँ
क्या उसके साथ चलते हुए   , शाम को यूं ही
बेख़याली में हाथ टकरा जाता है तुम्हारा  ?
क्या अपनी छोटी अँगुलियों से हाथ थाम लिया करती हो
क्या वैसे ही, जैसे मेरा थामा करती थीं ?

क्या बता दी सारी बचपन की कहानियां तुमने उसे
जैसे मुझे रात भर बैठ कर सुनाईं थी तुमने
क्या तुमने बताया उसको कि
तीस के आगे की हिंदी की गिनती आती नहीं है तुम्हे

वो सारी पापा और छोटी बहन के साथ वाली तस्वीरें
जिनमे तुम बड़ी प्यारी लगती थी
क्या उसे भी दिखा दीं तुमने
ये कुछ सवाल हैं
जो सिर्फ क़यामत के रोज़ पूछूँगा तुमसे..
क्योंकि उसके पहले तुम्हारी और मेरी बात हो सके
इस लायक नहीं हो तुम 

मैं पूछना चाहता हूँ की वो भी जब घर छोड़ने आता है तुमको
तो सीढ़ियों पर आँखे मींचकर क्या मेरी ही तरह
उसके सामने भी माथा आगे कर देती हो 
वैसे ही जैसे मेरे सामने करती थीं  

सर्द रातों में, बंद कमरो में तुम्हारी पीठ पर 
क्या वो भी मेरी तरह अपनी उंगलियो से 
हर्फ़ दर हर्फ़ अपना नाम गोदता है
तुम भी अक्षर दर अक्षर 
उसे पहचानने की कोशिश करती हो क्या 
वैसे ही जैसे मेरे साथ किया करती थीं   ? 
 
ये कुछ सवाल हैं जो सिर्फ क़यामत के रोज़ पूछूँगा तुमसे
क्योंकि उसके पहले तुम्हारी और मेरी बात हो सके  ,
इस लायक नहीं हो तुम
#ज़ाकिर खान की कलम से 

Thursday, 18 October 2018

कितना भी चाहूँ, तुम्हे लिख नही पाता ।।

कितना भी  चाहूँ तुम्हे लिख नही पता
कहना चाहता हु बहुत कुछ कह नही पाता ।
कैसे कहूँ कौन हो तुम ??
मेरी जान हो , पहचान हो अरमान हो तुम।
जो खूद ही खूद को दिया ऐसा फरमान हो तुम
तुमसे ही तो ज़िन्दगी है मेरी,
तुममें ही बसा मेरा चैन है ।
तुम ही हो सब कुछ,
तुम में ही हरदम डूबा मेरा नैन है ।
याद आते हो तो कभी गम दे जाते हो,
कभी हंसाते हो,कभी आंसू सनम दे जाए हो ।
याद आतीं है तुम्हारी वो हर बात,
वो पहली छुअन वो पहली मुलाकात,
तुम थी बेबाक, मैं शर्माता लड़का था,
तुम इठलाती गुड़िया सी,मैं खुद में सहमा सहमा था ।
तुम घिरी रहती थी लोगों से, मैं तेरी यादों में डूबा करता था।
तुम्हे परवाह नही थी किसी की, मैं तेरी परवाह किया करता था ।
कभी तुमसा अपना तो था न कोई, अब तुमसा कोई बेगाना  नही ।
जा चुके हो तुम इतने दूर, सुनो अब वापस आना भी नही ।
जी लेंगे तुम्हारे बगैर गर तुम जी लो,
हाँ सच्च है, कभी ऐसा सोचने की हिम्मत भी कर नही पाता ।
और
कितना भी चाहूँ तुम्हे लिख नही पाता ।।

Wednesday, 17 October 2018

रैप गॉड एमिनेम की कहानी ।। Ravi Ranjan Yadav ||

जिन्दगी हर वक्त अच्छे वक्त के साथ में नहीं चलती है, कई बार कुछ दुःख के पल देखने होते है, आज नहीं तो कल. लेकिन अति-दुःख हर इन्सान कि जिंदगी में एक न एक दिन आता ही है !!क्योंकि हर इन्सान की जिन्दगी में स्थितिया बदलती रहती है, कभी दुःख तो कभी सुख होता रहता है.

तो बात हो रही है एक ऐसे शख्स की जिनके गाने बिना lyrics पढ़े मुझे आज तक समझ नही आए ।
Marshall Bruce Mathers III, जिनको stage पर Eminem से सब जानते है । वो केवल एक रैपर नहीं बल्कि दुःख से सिख कर आगे बढ़ने कि प्रेरणा देने वाला व्यक्ति है !!Eminem एक ऐसे सिंगर है जिन्हें पूरी दुनियाँ रैप गॉड (Rap God) के नाम से पुकारती है।
 एमिनेम को अब-तक कुल मिलाकर 150 से भी ज्यादा विश्व प्रसिद्ध अवार्ड्स मिल चुके है। जिनमें American Music awards (8), Billboard Music Awards (17) और Grammy Awards (15) जैसे बड़े बड़े नामी अवार्ड्स भी शामिल है।

Eminem ने अपन जिन्दगी में वाकई में बहुत दुःख देखा है. इनका पालन पोषण और शुरूआती जीवन बहुत दुःख भरा रहा है.

निचे Eminem के कुछ दुर्भाग्य के बारे में लिखा है.

पापा छोड़ कर चले गए जब Eminem केवल 18 महीने के थे ।।
परवरिश इसकी माँ ने की थी जिनको ड्रग्स कि लत थी ।।
अपना बचपन एक शहर से दुसरे शहर बदलने में निकाला।।
9वी कक्षा में तीन बार फ़ैल होने कि वजह से school छोड़ दी ।।
पैसो के लिए संघर्ष किया, ड्रग्स एवं अल्कोहल की लत से लड़ना पड़ा यहाँ तक कि एक बार आत्मा हत्या भी करने कि कोशिश की ।।
उनकी खुदकी माँ और पत्नी ने Eminem पर एक मुकदमा चलाया ।।
सबसे अच्छा दोस्त को किसी ने गोली मार दी और मर गया ।।
उनके uncle ही थे जो Eminem कि जिंदगी को बदल सकते थे पर उन्होंने आत्मा-हत्या कर ली थी
तनाव के सिकार हो गए थे, जिसकी वजह से गोलियों की लत लग गई थी और मरते हुए बचे ।।
नयी जगहों पर जाने से Eminem को चिडाया जाता था पर Eminem ने बरदास किया ।।
इन सब दुखो से निकलने के बाद भी बना Eminem दुनिया का सबसे बड़ा रैपर ।।

#Happy_Birthday_Legend

Friday, 5 October 2018

What's wrong with the Society ??

There is a quora user, Sumit kumar. I came across his writing while scrolling quora feeds. Read one of the best step taken by him, which will surely quench your heart.

He Writes," My friend died a few years ago.

His wife is from a rural part of India.

She was a young, newly married girl who had completed her 1.5 years of married life.

Image source:-

All her dreams and hopes in life were destroyed in a blink.

He used to work as a mechanical engineer, was new in the company and hadn’t even completed a year.

So, after his death, she didn’t get any benefit from the company as compensation for his loss; except the amount the company owed him for his Overtime work.

Moreover, after his demise, she was made to wear white Saari. All her Comfort and Independence were taken away.

His death was confirmed as a sudden Accident and his family got a few lakhs from LIC.

His parents kept all the money to themselves and were treating her like a slave, getting all their household works done by her in return for providing her food.

She was refrained from even going out to any function or market as well.

She was just 26 years old back then and fully deserved to live her life the way she wanted to.

During Diwali, at around 7 pm, after 2 years of his demise, I went to their house and uncle and aunt welcomed me happily. They gave me sweets and blessings.

I asked them about my bhabi( sister in law)

They asked me not to talk about her on this Auspicious occasion of Diwali.

I didn’t understand what they meant by that.

I requested them to let me meet her.

They showed me the way to her room.

The room she was made to live in, was all dark, dirty and stinking very badly.

Bhabi was sitting down on the floor, quiet, like a patient in a coma.

It was so pathetic that I couldn’t bear to see that.

I called out her name from the doorway but she didn’t respond.

I went close to her but still, she didn’t respond, No body movement at all, it scared the hell out of me.

I touched her shoulder and she looked at me. She was looking so pathetic. It seemed like she didn’t get proper food to eat. It boiled my blood furiously.

I asked her “what happened bhabi?” She wasn’t in the condition to even talk.

I understood, that it was all because of her husband’s death (My friend).

I questioned myself how in this generation can it be possible.

I lost all respect for my uncle-aunt(My friend’s parents) and I told her to come along with me, she didn’t speak anything.

I held her up and started walking her out towards my car.

Uncle asked me where was I taking her. He even resisted and tried to stop me but I didn’t give a fcuk and took her to a hotel.

I told her to go and have a bath, but still, she was numb. So, I called up a female servant of the hotel and asked her to give her a bath.

She took her in and was getting her bathed.

Meanwhile, I arranged some clothes and food for her.

She was done with bathing.

She looked a little better now.

I told her to have food which she didn’t at first, but later I fed her forcibly and she managed to eat 5 Roti( wheat bread).

Then after having dinner she cried and spoke her heart out. She told how she was tortured and everything.

It disgusted me, but after all, this is society and people. What can one do!

I told her to live with me.

Everything was going fine until this fcuking society and people started interrupting me in every work.

But I fought with all of them.

Paying hotel bills was getting over my budget.

So, I rented a small 1 BHK flat for her which I could afford.

I give her monthly 6 to 10k for her daily expenses and started treating her like my younger sister.

But this fcuking society just can’t mind its own business. What they think is I sleep with her in return for helping her. Bullshit!

But who cares?

This is very wrong with the society.
Do I need this society's permission to be a human?? "

Sunday, 23 September 2018

Sylvester Stallone की बेमिशाल कहानी ।।Ravi Ranjan Yadav ||

त्याग, समर्पण, जुनून, हौसला,धैर्य और कठिन परिश्रम का पर्यावाची है sylvester Staylon । जब आप कभी हारने लगे ज़िन्दगी से, जब हौसला न हो मन में आगे लड़ने को,जब इन्तेहाँ हो जाए लोगों के ताने सहने का, ऐसे समय मे बड़ा हौसला दे जाता है इनका जीवन ।

 Sylvester को शुरू से ही acting का शौक था और उन्होंने अपने जेहन में ये बात अच्छे से बैठा ली थी की उन्हें actor ही बनना है . actor बनने का जूनून इतना था की इन्होने बीच में ही graduation की पढाई छोड़ दी और New York चले गए .

वहां पहुँच कर उन्होंने लगभग हर possible जगह auditions दिए पर कहीं भी सफलता नहीं मिली. इस बीच इन्होने कई पटकथाएं भी लिखीं , पर वो भी सेलेक्ट नहीं हो पायीं .

 हालत ऐसी हो गयी की उनके पास अपने परिवार को खिलाने -पिलाने तक के पैसे नहीं बचे , यहाँ तक कि उन्हें अपनी wife के जेवर भी बेचने पड़ गए .


ऐसी situation में कोई आम इंसान किसी भी काम को करने के लिए तैयार हो जाता पर Sylvester ने ठान रखी थी की उन्हें हॉलीवुड में ही जगह बनानी है वो भी एक एक्टर के रूप में .

दिन बड़ी कठिनाई से गुजर रहे थे , ऐसे ही किसी दिन Stallone टीवी पर boxing का एक match देख रहे थे , Weppner और Muhammad Ali की fight चल रही थी , उस वक़्त Ali अपने चरम पे थे और Weppner की हार लगभग तय थी पर बावजूद इसके Wepner डंटे हुए थे , वे बार -बार घूंसे खाते पर फिर भी लड़ना नहीं छोड़ते .

इस match ने Stallone को बहुत inspire किया उन्होंने इसी के आधार पर एक कहानी लिखने की सोची और वे लगातार 24 घंटे तक लिखते रहे और Rocky की script तैयार कर ली .

Script लिख कर वे बहुत excited थे उन्हें पक्का यकीन था की हर कोई इस स्क्रिप्ट को पसंद कर लेगा और वे उसे लेकर बहुत से producers के पास गए पर महीनो तक try करने के बावजूद कोई भी इसपर काम करने को तैयार नहीं हुआ .

Stallone अपनी ज़िन्दगी के सबसे बुरे दिनों से गुजर रहे थे , उनके पास अब बिलकुल भी पैसे नहीं बचे थे , इतने भी नहीं की वे अपने सबसे प्रिय दोस्त अपने कुत्ते को भी पाल सके और एक दिन मजबूर होकर वे एक शराब की दुकान के सामने खड़े हो गए और लोगों से अपना कुत्ता खरीदने के लिए कहने लगे . बहुत आग्रह के बाद किसी ने 25$ में उनका कुत्ता खरीद लिया . शायद ये स्टॉलोन की life का सबसे बुरा दिन था उन्हें वो करना पड़ा था जिसके बारे में वे सपने में भी नहीं सोच सकते थे।

खैर इस दौरान वे Rocky की script लेकर घूमते रहे और अंततः एक producer को ये कहानी पसंद आ गयी और उसने script खरीदने के लिए एक लाख डॉलर का offer दिया . जिसके जेब में एक भी पैसे न हों अगर उसे इतना बड़ा ऑफर मिले तो वो क्या करेगा। Of course  वो बिना एक पल गँवाए इसे accept कर लेगा।

पर ऐसी स्तिथि में भी Stallone ने शर्त रखी की वो स्क्रिप्ट तभी देंगे जब फिल्म में रॉकी का रोल उन्हें करने को दिया जाएगा.  पर producer इस बात के लिए तैयार नहीं हुआ और उसने  यह कह कर मना कर दिया की वो एक writer हैं actor नहीं , इसलिए उन्हें ये role नहीं मिल सकता है .

जब इस बात को दो हफ्ते बीत गए तो एक बार फिर producer ने उनसे contact किया और script के और भी अधिक पैसे देने का offer दिया … पर Stallone तैयार नहीं हुए। प्रोडूसर ऑफर बढ़ाता गया और Stallone इंकार करते रहे , यहाँ तक की चार लाख DOLLAR तक का offer मिलने के बाद भी Stallone इस बात पर अड़े रहे की Rocky का role सिर्फ और सिर्फ वही करेंगे .

अंत में producer को झुकना पड़ा , वो Stallone को रॉकी का रोल देने को तैयार हो गए पर स्क्रिप्ट के बदले में सिर्फ 25000 डॉलर ही दिए।

पैसा मिलते ही Stallone सबसे पहले उस शराब की दूकान पर गए जहाँ किसी आदमी को उन्होंने अपना कुत्ता बेचा था , वहां वो उस आदमी का इंतज़ार करने लगे, तीन दिन के इंतज़ार के बाद वो उन्हें मिला। स्टॉलोने ने कुत्ते के लिए 150 $ देने की पेशकश की पर वो आदमी तैयार नहीं हुआ …Stallone अपना offer बढ़ाते गए और अंत में बात 15000 Dollar और Rocky मूवी में एक छोटे से रोल पर ख़त्म हुई . Movie में आप उस आदमी और कुत्ते को देख सकते हैं .

Rocky बनी , release हुई और हम सब जानते हैं वो कितनी बड़ी हिट साबित हुई . उसे 1976 में Best Picture का Academy Award मिला . और इसके बाद Sylvester Stallone ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा ….Rocky और Rambo series के साथ -साथ उन्होंने बहुत सी हिट फिल्मे दी और आज अपनी मेहनत , लगन और कभी भी हार ना मानने वाले ज़ज़्बे के दम पर पूरी दुनिया के के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।!

Saturday, 22 September 2018

Elon Musk :The most Influential person of the world in present.

Elon Musk seems to be one of the most productive -- or at least busiest -- people on the planet. As the CEO of SpaceX and Tesla, he's busy enough, but add in working on high-visibility projects like the Hyperloop and Neuralink, and it's amazing what he's able to do as a single person.

He's fully committed himself to such a host of challenges because of his deep focus on the future of our planet. Musk believes the work he's doing is critical for our species to survive.


For him to keep up with his endless tasks, Musk has had to be efficient. There's no other way to handle all of the responsibilities he's taken on for such an extended time. Consequently, there's much to be learned from the ways in which Musk uses his time and practices efficiency.

It's worth noting that Elon Musk has optimized his output. He's made the decision to prioritize the work he's doing because of his desire to help the planet. Higher productivity is beneficial, but, depending on your circumstances or preferences, it's not always worth certain sacrifices Musk makes. Nonetheless, there's much to be learned from the way Musk carries himself.

There are many ways how Musk has managed the success in both business and life.





1. Constantly question how to improve.

Elon Musk is always thinking about how he can do things more efficiently. He's admitted to having never read productivity books. Yet he's constantly becoming a more efficient person by observing his life and habits. He notices when he's wasting time and is constantly examining his daily experiences.

Although this seems obvious, having the attention and effort to constantly evaluate areas for improvement is rather difficult. It requires an ability to challenge oneself and always be open to improvement.

2. Maintain hyperfocus.
Musk makes it challenging to interrupt. He doesn't have notifications constantly buzzing when he sits down to work. Instead, he's entirely engulfed with the task at hand. That allows him to both put more energy toward it and accomplish his work more quickly.



3. Save time spent on email.
Like many of us, Musk spends a significant amount of time in his email. That said, he's learned to cut that time down as much as possible. He doesn't fret over perfect phrasing or long messages. Instead, he keeps his emails concise and to the point.

4. Appropriately multitask.

While Musk understands the importance of hyperfocus on certain tasks, he also knows he can multitask in other situations. He's a big proponent of doing things like eating while responding to emails or having a conversation. He also frequently takes on simple tasks on his computer while he's with his kids.


5. Have extreme control over your calendar.
Musk has his calendar broken into five-minute chunks. That makes it extremely challenging to waste his time; he's thinking about it all the way down to five-minute increments. This makes an hour-long meeting feel like an enormous block of time.

It, therefore, eliminates overly long meetings or conversations. Furthermore, it allows Musk to be productive during the small breaks he has throughout the day. Instead of thinking aimlessly during those short breaks, Musk is doing something productive. Here are a few crucial tips to schedule a productive meeting.

6. Set optimistic goals.
Steve Jobs is famous for creating something called the reality distortion field. It's a term his employees coined because he would make it seem like they could accomplish tasks or projects in periods of time that were not humanly possible. Therefore, he was distorting their reality.

Elon Musk does something similar. He sets overly optimistic goals. While he's known for frequently failing to reach those goals on time, it forces him and his teams to push much harder; there's a constant sense of overwhelming urgency that boosts productivity.

7. Truly embrace improvement.
As much as many people preach personal growth, we often don't invest in it enough. Musk, on the other hand, has embraced it fully. He says, "You should take the approach that you’re wrong. Your goal is to be less wrong.”

This mindset allows him to truly constantly improve. Beyond just becoming more productive, Musk is always developing more effective ways of thinking. Those allow him to produce higher levels of output. Due to the perfection often needed in the companies he's running, a higher quality of work dramatically increases his productivity. It prevents him from needing to return to old issues. Here are a few time management tips to help you think more like Musk.


8. Obsess over learning.
Elon Musk is brilliant. He read two books a day throughout a long period of his childhood and continues to obsess over learning. His old employees have shared stories about the ways in which he abstracted compelling information from them, which speaks greatly to his character.

This constant learning has allowed him to both speed up the time it takes for him to understand a concept and increase the quality of responses and thoughts he's able to offer on topics.

9. Empower others.
Beyond his "reality distortion field," Elon Musk empowers his employees unlike almost any leader. People around the world dream of what it would be like to work for Musk because of the reputation he's developed.

He expects a lot from his employees and isn't afraid to blow up at them or fire them for a mistake. That being said, it's spurred an extremely high level of output from those around him. When his teams are able to accomplish so much, it takes work off his plate. Although he's not doing the work directly, without him as the guiding force, this work would almost surely not be accomplished as quickly.

10. Forget what others think about you.
Something that plagues many in the productivity department that Musk has been able to avoid is worrying about others' thoughts. Many people spend significant time and energy trying to fit in or get others to like them. Musk, on the other hand, doesn't care. He exerts his effort on the tasks at hand instead of navigating societal norms and social interactions. This has benefited his productivity greatly as he's able to put an even higher level of precision into his work.


Elon Musk isn't just an expert in his chosen fields but on the art of productivity as well. While most of us aren't on his level, we can take insights from how Musk lives his life to improve how we manage our own.

Friday, 21 September 2018

असफलता सच्चाई दिखा जाती है दुनियां की || Ravi Ranjan Yadav ||

सफलता के वक़्त हज़ारों की भीड़ होती है आपके पीछे । असफलता के दौरान कोई दूर दूर तक नज़र नही आता । शुरुआती दिनों में कोई आपको value नही करता, पर आप जैसे जैसे आगे बढ़ते जाते हैं लोगों की नज़र मे आपका सम्मान बढ़ता जाता है । आपका potential कोई नही देखता, लोग आपकी शोहरत देखते हैं । शुरुआती दिनों में ये सबके साथ होता है, लेकिन जब एक बार आप सफल हो जाए  फिर असफल और वही लोग जो आपकी खूब इज़्ज़त किया करते थे अगर ignore करने लग जाए, आपको कम आंकने लग जाए तो आदमी टूटने से लगता है ।


हालीवुड के एक्शन हीरो और बाडी बिल्डर एथलीट रहे अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर ने एक फोटो पोस्ट की है -
अपनी मूर्ति के नीचे सोते हुए जो उस होटल मे लगी है जिसका फीता उन्होने कैलीफोर्निया के गवर्नर रहते काटा था। होटल ने उनकी मूर्ति लगाते हुए उन्हे आजीवन होटल मे रूम फ्री मे देने की घोषणा की थी। रिटायर होने के बाद एक दिन होटल में रूम मांगने पर होटल ने बुकिंग फुल है कह मना कर दिया। अपनी ही मूर्ति के पास सोये और लिखा -
"पद और रसूख जाने के बाद दुनिया आपके लिए एक आम आदमी की तरह है ,
या फिर कहूं -सम्मान हमेशा समय और स्थिति  का होता है, पर इंसान उसे अपना समझ लेता है।"

इससे सीखो और  जियो ।।

Saturday, 15 September 2018

Engineer's Day Special. ||Ravi Ranjan Yadav ||

चार साल,चालीस पेपर,हज़ारों आसाइमेन्ट,कई प्रोजेक्ट और डिग्री एक ,नाम है इंजीनियरिंग ।।

एक अलग दुनिया, एक अलग कोर्स,एक अलग जहाँ । जो सिर्फ वही समझ सकता है जिसने इंजीनियरिंग की हो ।ये इंजीनियरिंग ज़िन्दगी के चार साल नही लेती बल्कि चार साल की एक ज़िन्दगी देती है , एक ऐसी ज़िन्दगी जिसे बहुत कम लोग जी पाते हैं, अगर मौका मिला भी तो बहुत  तो समझ  ही नही पाते ।



और तो और मैं देखता हूँ कुछ जाहिल केटेगरी के विद्वानों को जो इंजीनियरिंग का E नही जानते , लेकिन जब प्रवचन देना शुरु करेंगे तो बात ही यहीं से शुरू होगी,की इंजीनियरिंग में अब कोई स्कोप नही रहा ।।और देखो इन्हें,पूछो इनसे इनकी डिग्री तो मालूम चले कि दूसरों की बुराई के अलावा , दूसरों को नीचा दिखाने के अलावा इनका कोई काम नही है ।मैंने तो नही देखा एक भी बर्बाद इंजीनियर । और अगर वह सच मे बर्बाद है तो उसने इंजीनियरिंग की ही नही ।
इंजीनियरिंग मेहनत करना सीखाती है, लड़ना सिखाती है, संघर्ष करना सिखाती है ,जीना सीखाती है, अपने बल बता में कुछ कर दिखाने का जज्बा देती है ।ज़िन्दगी से भागना एक इंजीनियर की पहचान नही हो सकती ।

इंजीनियर का स्कोप नही रहा । बोलने से पहले एक बार अपने मूढ़ दिमाग से सोच तो लेते । अगर इंजीनियर का स्कोप नही है तो किसका है? एक्टिंग, राइटिंग, क्रिकेट, राजनीति, upsc,टीचिंग, फोटोग्राफर ,जहां देखो वहीं engineers हैं । टॉप लिस्ट उठा कर देखिए किसी भी फील्ड में। बोला किसी भी फील्ड में ।।

और एक बात खड़ा किजिए एक इंजीनियर को और एक नार्मल BSC, B.Com,B. A वाले को देख कर डिफरेंस ना समझ आ जाए तो कहना ।ठीक वही फीलिंग आएगी जो एक आर्मी वाले को और स्टेट पुलिस से compare करने पर आती है ।

हज़ारो लाइन्स कम पड़ेंगे ,एक इंजीनियर को रिप्रेजेंट करने के लिए । माना कुछ लोगों के लिए नालायक है वो मगर उसे पता है अपनी capability. लोग भले न विश्वास करते हो उस पर,अपने हर कदम पर विस्वास है उसे ।उसे पता है विनर है वह, जीतेगा आज नही तो कल। और हां, पड़ोस वाले अंकल ।अगली बार संभाल के । रगड़ने में भी इंजीनियर का कोई तोड़ नही ।।

तो इस धरती के अजीब प्राणियों के कौम जिसे लोग इंजीनियर कहते है,अभियंता दिवस (Engineers Day ) की हार्दिक बधाई ।।

#Engineers_Day

Sunday, 9 September 2018

IAS, IPS अब सुसाइड कर रहे हैं । वजह चाहे जो भी हो । मतलब साफ है । खुशी का पद, पैसा और पहुच तक कोई दूर दूर तक नाता नही है ।

Usually ऐसा देखा जाता है कि जो लोग हमसे दूर होते हैं, या अच्छे ओहदे पर होते हैं हम उन्हें ज्यादा खुश, ज्यादा संतुष्ठ मान लेते हैं ।अपने आप को कम आंकने की आदत सी पैड गई है हमे । अगर हम भी उसी जगह पर पहुँच जाए तो फिर से हम एक frame of reference तय करते हैं जहां से हम अपने आप को कम आँक सके । ज्यादा experience तो नही है, लेकिन हां इतना समझ आ गया है कि जो जहां है अगर वहीं संतुष्ट रहे, आगे के लिए मेहनत करते रहे तो बेस्ट है ।और हां हीरो तो हर फील्ड में होते हैं ।चाहे कोई भी फील्ड हो।


Tuesday, 4 September 2018

खुद से मत हार जाना ।। Ravi Ranjan Yadav ||

अमेरिका मे जब एक कैदी को फॉसी की सजा सुनाई गई तो वहॉ के कुछ बैज्ञानिकों ने सोचा कि क्यों न इस कैदी पर कुछ प्रयोग किया जाय ! तब कैदी को बताया गया कि हम तुम्हें फॉसी देकर नहीं परन्तु जहरीला कोबरा सॉप डसाकर मारेगें !
और उसके सामने बड़ा सा जहरीला सॉप ले आने के बाद कैदी की ऑखे बंद करके कुर्सी से बॉधा गया और उसको सॉप नहीं बल्कि दो सेफ्टी पिन्स चुभाई गई !
और क्या हुआ कैदी की कुछ सेकेन्ड मे ही मौत हो गई, पोस्टमार्डम के बाद पाया गया कि कैदी के शरीर मे सॉप के जहर के समान ही जहर है ।
अब ये जहर कहॉ से आया जिसने उस कैदी की जान ले ली ......वो जहर उसके खुद शरीर ने ही सदमे मे उत्पन्न किया था । हमारे हर संकल्प से पाजिटीव एवं निगेटीव एनर्जी उत्पन्न होती है और वो हमारे शरीर मे उस अनुसार hormones उत्पन्न करती है ।
75% वीमारियों का मूल कारण नकारात्मक सोंच से उत्पन्न ऊर्जा ही है ।
आज इंसान ही अपनी गलत सोंच से भस्मासुर बन खुद का विनाश कर रहा है ......
अपनी सोंच सदैव सकारात्मक रखें और खुश रहें
25 साल की उम्र तक हमें परवाह नहीँ होती कि "लोग क्या सोचेंगे ? ?
50 साल की उम्र तक इसी डर में जीते हैं कि " लोग क्या सोचेंगे ! !
50 साल के बाद पता चलता है कि
हमारे बारे में कोई सोच ही नहीँ रहा था ! !

Monday, 13 August 2018

शायरी ।।

मेरी ज़िंदगी मे तुम हो कि नही, मुझे नही मालूम।
बस इतना जानता हूं ,मेरी हर शायरी की वजह हो तुम।।

Friday, 1 June 2018

निराश न हो failures ।।

मोबाइल, फेसबुक और अखबार उन बच्‍चों से भरे हैं, जिन्‍होंने दसवीं में शानदार प्रदर्शन किया. 10वीं की बात की जाए तो लगभग 1 लाख से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने 90% से ज्यादा स्कोर किया है। 27000 के लगभग बच्चो नें 95% से ज्यादा स्कोर किया है पूरे देश में । सीन चौड़ा कर के घूम रहे है ऐसे बच्चे एवं उनके माता पिता.

लेकिन सच्च कहूँ तो मैं अपने आप को उस ओर खड़ा होने से नही रोक पाता जिस ओर ये बच्चे खड़ा हैं जिनसे लोग जिन्दी में ज्यादा एक्सपेक्ट नही करते ।आखिर एक failure को पता होता है कि अब कोई भी मार्कशीट, कोई भी कागज के बूते उसे ज़िन्दगी में कुछ नही मिलने वाला ।उसे ही करनी होगी मेहनत। उसे ही बढ़ानी होगी अपनी capabilities  । और दूसरी तरफ एक अच्छे परसेंटेज से पास हुआ विद्यार्थी को विशवास होता है अपने मार्कशीट पर, उस कागज पर ।आखिर कैसे मान लूँ मैं की वो बच्चा जिसे आज ये समझ आ गया है कि, उसका मार्कशीट नही उसके qualities ही बनाएंगे उसे सक्सेसफुल, जिंदगी के रेस में पीछे पड़ जाएगा उस बच्चे से जिसे एक कागज के टुकड़े पर यकीन है। सफल बच्‍चा उस बच्‍चे से कैसे बेहतर हो सकता है, जो तय समय में रटी/समझी चीजें ठीक से नहीं लिख पाया. यह समझ पाना बहुत मुश्किल है कि कैसे एक कम नंबर पाने वाले बच्‍चे को उस बच्‍चे से कमतर कहा जा सकता है, जिसके नंबर उस बच्‍चे से अधिक आए हैं. बात केवल भारत की नहीं है, दुनिया के तमाम बड़े देश इस बात की गवाही देते हैं कि वहां के इतिहास, विज्ञान, शोध, राजनीति, कला, सिनेमा में जितना योगदान कम नंबर लाने वालों का है, उतना दूसरे किसी का नहीं है. और ऐसा तो हुआ नही आज तक कि कम प्रतिशत वाले बच्चे ज़िन्दगी में अच्छी मुकाम हासिल न कर पाए हो । और ये so called toppers कोई बहुत बड़ी तीर मार गए हो । हाँ, लेकिन मेहनती होना जरूरी है। और average लोग ज्यादा मेहनती होते हैं, ऐसा मैंने देखा है ।।

तुमने कहा था ।। Ravi Ranjan Yadav ||



मेरे हाथों में smiley बनाते बनाते ,
मुझे सुबह सुबह हर रोज़ फूल देकर
थोड़ी सी भी चिंता होनर पर,
मेरे कन्धों पर सो कर ।
मेरे फ़ोन को अपने हांथो में पकड़कर कहा था तुमने मुझसे
कि अच्छा लगता हूँ मैं तुम्हे ।
कि कभी भूल नही सकते मुझे तुम।
कि संभव नही ये दोस्ती टूट जाए ।
कि कभी हो नही सकता कि हम छूट जाए ।
कि हमेशा याद रहूंगा मैं तुम्हे ।
कि हरदम आएंगे हसीन लम्हे ।
कि कोई रोक नही सकता हमे ।

तो बताओ न आज
क्यों दूर हो गए हो मुझसे ।
क्यों नही आतीं यादें हमारी।
क्यों नही होती घंटों बात ।
क्यों नही बनाती तुम वो स्माइली लेकर अपने हाथों में मेरा हाथ ।
क्यों नही कहती तुम मुझसे की मुझे वो परेशान करता है !
क्यों नहीं कहती अब तुम की तुम्हारा दिल अब मेरे पास ही रहता है ।
आखिर क्यों रूठे हो मुझसे, बताओ न  ।
रोता रहता हूं तेरे यादों में, आओ मुझे समझाओ न ।
ये लो मेरे हाथ, लेकर अपने हाथों में फिर से एक स्माइली बना दो ।
सो रहा हूँ फिर से मैं, कहकर गुड मॉर्निंग फूल मेरे हाथों में थमा दो ।
जीता हु बस अब तेरे यादों के सहारे आओ न वो अब बतला दो कि क्या थी असलियत उसकी,
जो तुमने कहा था ।।

Thursday, 17 May 2018

शायरी ।।

कहो खुदगर्ज या कह दो मतलबी मुझे तुम।
पर सुनो ,
मुझे आज भी तुम्हारी जरूरत है ।

Tuesday, 15 May 2018

शायरी ।

इन लफ़्ज़ों में न तलाश कर वजूद मेरा ।
मैं उतना लिख नही पाता, जितना महसूस करता हूँ ।।

Thursday, 10 May 2018

शायरी। ।

बड़ी आरजू थी उनसे मिलने की,
जब वो मिले, तो अनजाने से लगे ।।

Saturday, 28 April 2018

Saturday, 24 March 2018

पहले से ज्यादा मुस्कुरात हूँ अब
पहले से ज्यादा  उदास  हूँ  मैं ।।

Tuesday, 20 March 2018

शायरी।।

हर रोज़ दफ़न होते देखा है मैन कुछ को यहां ।
कुछ इसे कब्र कहते है, कहते है कुछ इसे दिल।।

शायरी।।

किस बात की खुशी है अए दिल
जो इतना मुस्कुराते हो ।
सच मे खुश हो , ये बता दो
या है कोई दर्द जो जमाने से छीपाते हो ।।

शायरी।।

क्यों अपने ही आत्मसम्मान की अर्थियां निकाल रहा है वो ?
वो उसके तरफ नज़र भी नही फेर रहे है,
और वो आंखे बिछाए बैठा है उनके खातिर।
चिल्लाए लोग, पागल है साहब ।
मैंने भी बोला, हाँ इशक में होगा ।।q

Saturday, 3 March 2018

शायरी ।।

अपने यादों से कहो, यूँ न मुझे  परेशान किया करें।
तुम्हारी है तो तुम जैसी नाज़ुक भी होंगी,
थक जाएंगी , कहो उन्हें थोड़ा आराम किया करे ।

वो कहते हैं..!!




वो कहते हैं, क्यों नही करते प्यार मुझसे ?
मैं कहता हूं, तुम मुझसे प्यार करती हो  तुमने बताया कब है ?
वो कहते हैं,
क्यों रहते ही यूँ दूर मुझसे,
मैं कहता हूँ,
दौड़ा चला आऊंगा, बुलाओ तो सही, आखिर तुमने मुझे पास बुलाया कब है ?
वो कहते हैं,
आंखे लाल है तुम्हारी, चेहरे उदास हैं ।
मैं कहता हूँ , आती नही नींदे तुम्हारे बगैर,
आखिर गोद मे अपने मेरा सिर रखकर तुमने सुलाया कब है?

वो कहते हैं,
एक नशा है तुममें
मैं कहता हूँ "तुम्हारे चंचल आंखों का असर है,
जाम किसी ने मुझे पिलाया कब है ?
वो कहते हैं, यूँ न चाहो तुम मुझे टूटकर,
खो दोगे खुद को मेरे खातिर,
मैं कहता हूँ कि,
खोने दो न बदनसीब हूँ इश्क़ में,
खोने के सिवा कुछ पाया कब है ?
वो कहते हैं ,
क्यों नही कहते तुम्हारे ये लब,
जब इतना तुम मुझसे प्यार करते हो,
मैं कहता हूँ , प्यासे हैं,
तुमने अपने लबों से पिलाया कब है ?
वो कहते हैं,
सच्चा है प्यार तुम्हारा,चाहूंगी तुम्हे ज़िन्दगी भर।
मैं कहता हूँ, चाहो न चाहो तुम, तुम्हारी मर्ज़ी ।
हमने तुम्हे भुलाया कब है ?
वो कहते हैं, क्यों नही करते प्यार मुझसे ?
मैं कहता हूं, तुम मुझसे प्यार करती हो, तुमने ये बताया कब है ?

Thursday, 1 March 2018

Work will bring you everything..!!


What do you want ??
Money ?
Glory?
Appreciation ?
Love ?
Prosperity ?
Say , what do you really want ??

All the things will be provided by just one thing. And that is work. Your work will bring you everything. Everything and that also in a huge amount. One thing I have been observing up to now in many people and in even me that we are rushing towards the individual things. Many are running for money . Many for love and many for few different individual things. Inspire of the fact that all these things could be found combined.

We need to concentrate only on one thing. We need to do the thing what we really love or we should love the things what we are doing. Once we start working on , everything will come to us.
Money comes to only those who are expert in their respective fields. This experience can be found out just by working.
Most of the breaks up, I observe are just because of the fact that the person initiating this break up does not feel worth to the other person. If we will be better in our work, we will have a good status and reputation in the society and this status, reputation will definitely bring a respect in everyone's eye.

For everything, I said everything .
There is one key.
Work.
Let's forget about everything and start working on our dream. Let's be crazy for our goal. Let's take one step and do not think anything other than this.
And in the process, we will not even be able to know from where all the things are coming in our life.
Everything. We will have everything.
Let's work on one thing.

Wednesday, 28 February 2018

शायरी ।।

सब ख़फ़ा हैं मेरे लहजे से
पर मेरे हाल से कोई वाकिफ नहीं ।
टूट चुका हूं अंदर से,
दिखावा करता हूँ, है सब सही सही ।।

Tuesday, 27 February 2018

Biggest Pain. !!

What exactly is the biggest pain ?

The biggest pain is non other than loosing those people who were considered to be the closest soul to you. Seeing them behaving like strangers. Recalling their memories.Trying to delete their entire role from your mind,what they had played and pretending that everything has been finished and ended up.But only you know that the moments what you have shared were not just ordinary moments. Moments when laced with the feelings,care and love becomes the memory and memories can not be forgotten so easily.
And it becomes more tough, if you are a true kind heated person. If you give more priority to feelings, to emotions, to the bonding you will be more hurted.

Do they care about you ?

No, No one cares. In this artificial world there is no value of the feelings or emotions. Or even the promises. Promises are made in the first second and in just the other second they are broken. As the people meets another better person than you, you are no longer important to them. They say , all those memories that you shared, all those moments what you lived and every emotions what you had was past. They say, be practical. And you like people who do not understand these modern technique of establishing relations and breaking up when needed, gets hurted the most.

How to overcome this ??


No one can harm or hurt you , expect you yourself is what Mahatma Gandhi said.
Life is like a mirror smile at it.
Man is mortal.
Free yourself from attachments.
What was meant to be , was meant to be and well what was not , was not.

Don’t worry about what has happened in your life.
Stand firm and be strong , you have to repair that broken , injured heart of yours.
  • Try to socialize more , make more friends both men and women.
  • Try to work even harder at your workplace or anywhere - put in all the negative energy into working in your office.
  • Don’t keep yourself idle - an idle mind is a devil’s workshop.
  • Don’t simply sulk all the time - fight it- fight your emotionsand get control over the situation.
  • Try to surround yourself with happy and positive people.
  • Use those faces as your motivation.Whenever you feel like you are tired, you are bored up with the job or whatever you are doing always remember , when you will meet that person in future you have to realise that what they did was wrong to them.And you do not have to say anything to them at that time.You just have to make them realise through your success.
  • Change everything.Change your habit, change your personality, change your attitude and most importantly change your destiny.
  • Be a beast.Always work like a crazy guy who is born to be Champion. As you will be successful, everything will start being better and you will not have to try to forget anyone. You will meet more better people, more beautiful faces.
  • Till then wait and work.

Tuesday, 20 February 2018

मजदूर..!!

मौत से नही डरा वो, अपने बच्चों से डर गया ।
ये उस दिन की बात है साहब,
खाली हाथ  जब मजदूर अपने घर गया ।।

शायरी ।।



चलो एक बात बताऊं तुम्हे,
मेरी हर बात के बात में बस तुम्हारी बात की बात होती है ।।

Saturday, 17 February 2018

Sometimes you need to take toughest Path..!!



"बाज लगभग 70 वर्ष जीता है ....
परन्तु अपने जीवन के 40वें वर्ष में आते-आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है ।
उस अवस्था में उसके शरीर के
3 प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं .....
पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है, तथा शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं ।
चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है,
और भोजन में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है ।
पंख भारी हो जाते हैं, और सीने से चिपकने के कारण पूर्णरूप से खुल नहीं पाते हैं, उड़ान को सीमित कर देते हैं ।
भोजन ढूँढ़ना, भोजन पकड़ना,
और भोजन खाना .. तीनों प्रक्रियायें अपनी धार खोने लगती हैं ।
उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं....



1. देह त्याग दे,
2. अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह त्यक्त भोजन पर निर्वाह करे !!
3. या फिर "स्वयं को पुनर्स्थापित करे" !!
आकाश के निर्द्वन्द एकाधिपति के रूप में.
जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं,
अंत में बचता है तीसरा लम्बा और अत्यन्त पीड़ादायी रास्ता ।
बाज चुनता है तीसरा रास्ता ..
और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है ।
वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है, एकान्त में अपना घोंसला बनाता है ..
और तब स्वयं को पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया प्रारम्भ करता है !!
सबसे पहले वह अपनी चोंच चट्टान पर मार मार कर तोड़ देता है,
चोंच तोड़ने से अधिक पीड़ादायक कुछ भी नहीं है पक्षीराज के लिये !
और वह प्रतीक्षा करता है
चोंच के पुनः उग आने का ।
उसके बाद वह अपने पंजे भी उसी प्रकार तोड़ देता है,
और प्रतीक्षा करता है ..
पंजों के पुनः उग आने का ।
नयी चोंच और पंजे आने के बाद वह अपने भारी पंखों को एक-एक कर नोंच कर निकालता है !
और प्रतीक्षा करता है ..
पंखों के पुनः उग आने का ।



150 दिन की पीड़ा और प्रतीक्षा के बाद ...
मिलती है वही भव्य और ऊँची उड़ान पहले जैसी....
इस पुनर्स्थापना के बाद
वह 30 साल और जीता है ....
ऊर्जा, सम्मान और गरिमा के साथ ।
इसी प्रकार इच्छा, सक्रियता और कल्पना, तीनों निर्बल पड़ने लगते हैं हम इंसानों में भी !
हमें भी भूतकाल में जकड़े
अस्तित्व के भारीपन को त्याग कर कल्पना की उन्मुक्त उड़ाने भरनी होंगी ।
150 दिन न सही.....
60 दिन ही बिताया जाये
स्वयं को पुनर्स्थापित करने में !
जो शरीर और मन से चिपका हुआ है, उसे तोड़ने और
नोंचने में पीड़ा तो होगी ही !!
और फिर जब बाज की तरह उड़ानें भरने को तैयार होंगे ..
इस बार उड़ानें और ऊँची होंगी,
अनुभवी होंगी, अनन्तगामी होंगी ।
हर दिन कुछ चिंतन किया जाए
और आप ही वो व्यक्ति हे
जो खुद को दुसरो से बेहतर जानते है ।
सिर्फ इतना निवेदन की निष्पक्षता के साथ छोटी-छोटी शुरुवात करें परिवर्तन करने की ।

नही है कोई बात मुझमे , मेरी एक बात बन जाओ न तुम ||

नहीं है  कोई बात मुझमें, मेरी एक बात बन जाओ न तुम ।।


नही है कोई बात मुझमें, मेरी एक बात बन जाओ न तुम ।
टूट चुका हूं , अब तेरे बगैर
आओ फिर ले कर मेरा सिर अपने गोद में,
मुझे हँसाओ न तुम ।
नही है कोई बात मुझमे , मेरी एक बात बन जाओ न तुम ।

नही लगता दिल कही तेरे बगैर,
खोया खोया सा रहता हूं ।
आती नही नींदे रात भर,
तेरी यादों को पिरोया करता हूँ ।
सोच सोच कर उन हसीन लम्हो को, रोता रहता हूँ मैं ।
क्या कहूँ, कैसे कहूँ
बस खुद को कोसता रहता हूँ मैं ।
बिखर रही है अब ज़िन्दगी मेरी,
आकर एक बार फिर संभाल जाओ न तुम,
नहीं है कोई बात मुझमें,
मेरी एक बात बन जाओ न तुम ।


कहते हैं लोग अब, खूब मुस्कुराया करता हूँ ।
क्या जाने वो बेखबर
किस कदर मैं दर्द छिपाया करता हूँ ।
कभी हंसता हूँ, कभी रोता हूँ ।
कभी लिख लिख कर उन लम्हो को फिर से मैं जीता हूँ ।
ढूंढती हैं निगाहें तुम्हे
ले कर तुम्हारी तस्वीर बार बार तकता रहता हूँ ।
आओ न तुम , फिर से संभाल लो मुझे ।
डांटो तुम, प्यार से मार लो मुझे ।
बना कर बच्चो सी शक्ल,
बड़ो से समझाओ तुम ।

नहीं है कोई बात मुझमें,
मेरी एक बात बन जाओ न तुम !!

Friday, 9 February 2018

हार नही सकते तुम।


हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।
संघर्ष के इन कांटों पर चलकर, मंज़िल का सीना चीरना होगा।
कभी गिरकर , कभी संभलकर।
कभी रो कर , कभी बिलखकर ।
मंज़िल के लिए तुम्हे लड़ना होगा।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।


याद करो तुम।
जब माता पिता ने तुम्हे पहली बार गोद मे उठाया होगा।
देखा होगा तुम्हारी आँखों में फिर कुछ ख्याल उन्हें आया होगा।
चुम कर माथा तुम्हारा कहा होगा उन्होंने,
जीवन के कष्टो को ये मिटाएगा ।
पसरा है जो इस ज़िन्दगी में अंधियारा,
चिराग बन कर ये अब मिटाएगा।
अब असफलताओ से डर कर रुक गए तुम,
क्या मुँह उन्हें दिखाओगे।
तुम्हारा अस्तित्व तुमसे सवाल करेगा,
बताओ न, क्या जवाब दे पाओगे।
पड़ोसियों के उन तानों को, अब तारीफों में बदलना होगा ।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।

चलो छोड़ दो मासूमियत,
फेक कर असफलताओ का तमगा जीवन सृजन में लग जाओ ।
क्रूर बनो ,लक्ष्य के खातिर
तप  में बस तुम गड जाओ ।
छोड़ दो तुम अब दुनियादारी,
लक्ष्य आंखों से ओझल हो ना पाए।
सोच लेना अब के बाद तानें कोई कस ना पाए ।
गरजो तुम, एक आवाज बनो।
रोक सके न कोई तुफा , एक ऐसी परवाज बनो ।
बजा दो बिगुल, लक्ष्य के लिए एक रण हो ।
पल पल हो, क्षण क्षण हो ।
कटते रहो, टूटते रहो , रुके रहो , टिके रहो ।
लक्ष्य के लिए इस संघर्ष पथ पर टिकना होगा।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।।

हार नही सकते तुम।

हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।
संघर्ष के इन कांटों पर चलकर, मंज़िल का सीना चीरना होगा।
कभी गिरकर , कभी संभलकर।
कभी रो कर , कभी बिलखकर ।
मंज़िल के लिए तुम्हे लड़ना होगा।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।


याद करो तुम।
जब माता पिता ने तुम्हे पहली बार गोद मे उठाया होगा।
देखा होगा तुम्हारी आँखों में फिर कुछ ख्याल उन्हें आया होगा।
चुम कर माथा तुम्हारा कहा होगा उन्होंने,
जीवन के कष्टो को ये मिटाएगा ।
पसरा है जो इस ज़िन्दगी में अंधियारा,
चिराग बन कर ये अब मिटाएगा।
अब असफलताओ से डर कर रुक गए तुम,
क्या मुँह उन्हें दिखाओगे।
तुम्हारा अस्तित्व तुमसे सवाल करेगा,
बताओ न, क्या जवाब दे पाओगे।
पड़ोसियों के उन तानों को, अब तारीफों में बदलना होगा ।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।

चलो छोड़ दो मासूमियत,
फेक कर असफलताओ का तमगा जीवन सृजन में लग जाओ ।
क्रूर बनो ,लक्ष्य के खातिर
तप  में बस तुम गड जाओ ।
छोड़ दो तुम अब दुनियादारी,
लक्ष्य आंखों से ओझल हो ना पाए।
सोच लेना अब के बाद तानें कोई कस ना पाए ।
गरजो तुम, एक आवाज बनो।
रोक सके न कोई तुफा , एक ऐसी परवाज बनो ।
बजा दो बिगुल, लक्ष्य के लिए एक रण हो ।
पल पल हो, क्षण क्षण हो ।
कटते रहो, टूटते रहो , रुके रहो , टिके रहो ।
लक्ष्य के लिए इस संघर्ष पथ पर टिकना होगा।
हार नही सकते तुम ,
इस जीवन पथ पर जीतना होगा।।

फिर क्यूँ तुम्हारी याद आती है ??

फिर क्यूँ तुम्हारी याद आती है ??

मैं तो तुम्हे भूल जाना चाहता हूँ ।
 फिर क्यूँ तुम्हारी याद आती है??
क्यूँ मुझे रुलाती है?
आखिर क्यूँ तड़पाती है ।
सोचना भी नही चाहता मैं जिन लम्हो को,
बताओ न तुम, ये यादें क्यों वहां बार बार ले जाती है ।
फिर क्यूँ तुम्हारी याद आती है ??

धड़कने तुम्हे याद करती है, सांसे तुमसे वापस आने की फरियाद करती है ।
जिया है हमने जिन पलों को एक साथ,
आ आ कर याद मुझे बर्बाद करती है।
मैं पाना चाहता हूँ तुम्हे,
जानता हूँ मुमकिन नही,
जीना चाहता हूँ  फिर से उस लम्हों को, मुश्किल ही सही ।


नहीं, मत आना तुम अब मेरे पास ।
मैं जी लूंगा यादों के सहारे ।
कभी रो कर, कभी चुप हो कर ।
कभी खामोशियों को जी कर, कभी तेरे सपनो में होकर ।
नहीं देख सकता तुम्हें दुसरो की बाहों में,
पर न जाने क्यों ये आंखे तेरी खातिर तरस जाती है।
मैं तो तुम्हे भूल जाना चाहता हूँ ।
 फिर क्यूँ तुम्हारी याद आती है ??

जानता हूं, अब लाख जतन कर भी तुम्हे पा न सकूँगा।
होगी तुम सामने तो भी अपना ना सकूँगा।
रोएगी आंखें , तरसेगी निगाहें।
धड़कता रहेगा दिल, बहुत याद आएगी तुम्हारी प्यारी बातें ।
पर अब मैं फिर से टूटना नही चाहता।
समेटा है बिखरे ज़िन्दगी को, फिर से बिखेरना नही चाहता ।
जब ख्याल ही नही रहा मेरा
फिर messages मे क्यों मेरा हाल पूछ जाती  हैं ?
मैं तो तुम्हे भूल जाना चाहता हूँ
फिर क्यूँ तुम्हारी याद आती है ??
आखिर क्यों याद आती है?
बताओ न, क्यों याद आती है ??

Tuesday, 6 February 2018

Sad sayari..!!

सुनो । दर्द दे कर भी मेरे दिल को मुस्कुराया करो तुम ।
खुशी होती है तुम्हे खुश देखकर ।

Sad Sayari..!!

यूँ तो हमे शिकायत नही तुमसे।
शायद हम कुछ दे ना सके ।
बस एक बात पूछना चाहता हु
कोई जान से बढ़कर क्या दे सकता है??

सच्च में वह एक हारा हुआ इंसान है साहब। पहले ज़िन्दगी में प्यार हार गया और अब प्यार में ज़िन्दगी ।


Thursday, 18 January 2018

क्यों जी रहे हो , मर मर कर !!

वह एक हीरो था । काबिलियत कूट कूट कर भारी थी । विश्वास था उसे कि कुछ बहुत अच्छा करेगा । पढ़ाई करी उसने। फिर नौकरी।  और इस तरह उसकी जिंदगी चलती गई । और इस तरह उसने किसी और के सपनो को पूरा करने के लिए अपने सपनो को मार दिया ।

क्या हुआ अच्छी नही लगी कहानी ??
तो बदल डालो न ।आप ही की तो ज़िन्दगी है । रोका किसने है ??क्यों जी रहे हो मर मर कर, वो भी दूसरों के खातिर ।

क्यों जी रहे हो , मर मर कर !!

वह एक हीरो था । काबिलियत कूट कूट कर भारी थी । विश्वास था उसे कि कुछ बहुत अच्छा करेगा । पढ़ाई करी उसने। फिर नौकरी।  और इस तरह उसकी जिंदगी चलती गई । और इस तरह उसने किसी और के सपनो को पूरा करने के लिए अपने सपनो को मार दिया ।

क्या हुआ अच्छी नही लगी कहानी ??
तो बदल डालो न ।आप ही की तो ज़िन्दगी है । रोका किसने है ??क्यों जी रहे हो मर मर कर, वो भी दूसरों के खातिर ।

Tuesday, 2 January 2018

गाँव की गोद में ।। Ravi Ranjan Yadav


इंदौर की व्यस्त ज़िन्दगी से दूर, और 4 साल की engineering की खूबसूरत ज़िंदगी के बाद, रांची की उन यादों को छोड़कर कलकत्ता , पटना होते हुए आज गांव  की गलियों में जैसे ही पहला कदम पड़ा , बचपन के एक एक किस्से डायरी के पन्ने की भांति खुल खुल कर सामने आने लगे । कभी बचपन के यादों से जुड़ा वो आम का पेड़ सामने आ गया, तो कभी हमारे आतंक से परेशान वो करंज का पेड़ शिकायत करने लगा। वो महुआ का पेड़ जहां हम बड़ी देर तक बैठ कर बदमाशियां करते थे, बड़ी खुश हुआ था आज। ऐसा लग रहा था जो जिंदगी हम 12 साल पहले छोड़कर चले गए थे वो फिर से वापस आ गया हो । ऐसा लग रहा तब जैसे नियति हमे मौका दे रही हो हो कि जी लो फिर से वो ज़िन्दगी जो तुम ज़ी नही पाए । एक एक करके लोग मिले । बहुत दिनों के बाद । ऐसा लग रहा था जैसे ये लोग नही , रिश्ते मिल रहे थे। वैसे रिश्ते जिन्हें 12 साल पहले छोड़ आए थे हम। वैसे रिश्ते जो लगभग भूल चुके थे हमे । हाँ मगर एक बात थी , इतने समय की दूरियीं को पाटने के लिए वो 3-4 दिन की छुट्टी काफी थी।
इन 3-4  दिनों में ही शायद 3-4 वर्ष जी आए थे हम! 
लेकिन सोचता हूं मैं कभी कभी। क्यों आखिर हम भूलने लगते है उस जगह को जिसने हमे अपने गोद मे खेलाया , क्यों छोड़ जाते हैं हम उस जगह को जहां हम पले बढ़े ।
क्यों हमे कमी लगने लगती है उस जगह में आखिर ?
क्यों नही रहना चाहते हम वहां ।
क्यों सब अपनो को छोड़ कर पराया  लोगों के बीच रहने में गर्व होने लगता है हमे  ?
क्यों??
मैं बताता हूं ।
क्योंकि हमें दूसरे जगह रहने पर इज़्ज़त महसूस होती है।
क्योंकि अगर हम दूसरे जगह पर रहे तो लोग एक अलग ही respect के सथ देखते है हमें ।
क्योंकि हम में इतनी हिम्मत नही है कि हम अपनी एजुकेशन को पूरा करने के बाद अपने ही जगह पे कुछ ऐसा plan करें कि हमारे साथ साथ हमारा वो जगह भी आगे बढ़े। स्वार्थी हो गए है हम । अपनी सोचते हैं । डरपोक है हम । इतनी सी हिम्मत नही कि दूसरों की नौकरी छोड़कर कुछ अपना ठान सके । कुछ अलग कर सके। कुछ अलग सोच सके । Negative हो चुकी है अपनी mentality। अगर कोई एजुकेशन कम्पलीट करने के बाद फिर से वही आकर कुछ करने को सोचता है तो taunt मारने से नही चूकते हम । failure दिखता है हमे ।
शायद सुधर जाए हम दोनों तरह के लोगों की मानसिकता । शायद । हमे कोई शर्म महसूस ना ही अपना कुछ start up करने में। अपने लोगों के बीच।
चाहे कोई कुछ भी कह दे ।
और अगर कोई ऐसा करे तो उसकी रेस्पेक्ट हो हो मन में। सपोर्ट करें हम ऐसे कर्मवीरों को। और अगर हम ऐसा कर पाए तो शायद हर जगह को एक अच्छा जगह बना पाएंगे हम।
करेंगे ना आप ऐसा ??
करिएगा जरूर ।।
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